यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सबसे गंभीर स्थिति फ्रांस में देखने को मिल रही है, जहां लगातार बढ़ते तापमान के कारण मौतों की संख्या में इजाफा होने से कई क्षेत्रों में मॉर्चरी (शवगृह) पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगा है। कुछ स्थानों पर शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता कम पड़ने के कारण प्रशासन को अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिणी और मध्य फ्रांस के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया है। लगातार कई दिनों तक चल रही लू और गर्म हवाओं ने बुजुर्गों, बच्चों तथा पहले से बीमार लोगों के लिए जोखिम काफी बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है और अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन तथा गर्मी से जुड़ी अन्य समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा कर सकती है। लंबे समय तक ऊंचे तापमान के संपर्क में रहने से शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे हीट स्ट्रोक, अंगों के काम करना बंद करने और कई मामलों में मृत्यु तक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने खासतौर पर अकेले रहने वाले बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
फ्रांस सरकार ने कई क्षेत्रों में हीट अलर्ट जारी किया है। स्थानीय प्रशासन लोगों से दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और जरूरत पड़ने पर सामुदायिक कूलिंग सेंटर का उपयोग करने की अपील कर रहा है। स्कूलों, अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में भी विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके।
केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि स्पेन, इटली, पुर्तगाल और ग्रीस सहित यूरोप के कई देश भी रिकॉर्ड तापमान का सामना कर रहे हैं। कई जगहों पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं, जबकि बिजली की बढ़ती मांग के कारण ऊर्जा व्यवस्था पर भी दबाव देखा जा रहा है। कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है और फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में यूरोप में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं। यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करने और जलवायु अनुकूलन के उपायों को तेजी से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने सरकारों से स्वास्थ्य सेवाओं, आपदा प्रबंधन और शहरी बुनियादी ढांचे को अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे हीट अलर्ट को गंभीरता से लें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि गर्मी से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों और मौतों को कम किया जा सके।








