जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार भ्रष्टाचार एवं कदाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत रिश्वतखोरी, दहेज उत्पीड़न, पद के दुरुपयोग करने एवं राजकीय दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं करने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में, दहेज उत्पीड़न के प्रकरण में एक चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध धारा 498-ए एवं 406 भारतीय दण्ड संहिता में दोष सिद्ध होने पर उन्हें राजकीय सेवा से पदच्युत करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने राजस्थान सिविल सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम-16 के अन्तर्गत 2 प्रकरणों में सेवारत अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने तथा एक सेवानिवृत्त पशु चिकित्सा अधिकारी की 20 प्रतिशत पेंशन हमेशा के लिए रोकने का फैसला किया। इसी प्रकार, सीसीए नियम 34 में रिव्यू के 5 प्रकरणों में विभिन्न अधिकारियों की याचिकाओं को खारिज करते हुए दण्डादेश यथावत रखे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने आपराधिक प्रकरणों में आरोपियों की मदद करने के बदले रिश्वत मांगने के एक प्रकरण में तत्कालीन वृत्ताधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 19 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के प्रावधान के अन्तर्गत अभियोजन स्वीकृति जारी की है। इसी प्रकार, भीलवाड़ा के तत्कालीन सहायक वाणिज्यिक कर अधिकारी, वृत्त-ए राकेश खोईवाल के खिलाफ सीसीए नियम 16 के अंतर्गत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री ने राजकीय कीमती भूमि को नीलामी के बजाय खांचा भूमि के रूप में आवंटन करने के प्रकरण में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के विरूद्ध अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के नियम 8 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की मंजूरी भी प्रदान की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का स्पष्ट मानना है कि लोकसेवकों से ईमानदारी, पारदर्शिता एवं जवाबदेही की सर्वाेच्च अपेक्षा की जाती है। भ्रष्टाचार, कदाचार या अनुशासनहीनता के किसी भी मामले में कोई रियायत नहीं बरती जाएगी बल्कि नियमानुसार कठोर, निष्पक्ष एवं समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी








