राजस्थान की राजधानी जयपुर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। जयपुर पुलिस की साइबर टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ठगी के करीब 2.85 करोड़ रुपये होल्ड करवाए हैं। इसके अलावा साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन भी ब्लॉक कर दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय से मिल रही साइबर ठगी की शिकायतों और तकनीकी निगरानी के बाद की गई। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
देशभर के लोगों को बनाते थे शिकार
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ऑनलाइन फ्रॉड के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते थे। वे फर्जी कॉल, सोशल मीडिया, निवेश योजनाओं, बैंक अधिकारी बनकर या अन्य डिजिटल माध्यमों से लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट से पैसे निकाल लेते थे।
पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने कई राज्यों के लोगों को निशाना बनाया है। मामले में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन की गहन जांच की जा रही है।
2.85 करोड़ रुपये कराए होल्ड
जयपुर पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन और संबंधित बैंकों के सहयोग से कार्रवाई करते हुए ठगी के करीब 2.85 करोड़ रुपये होल्ड कराए हैं। अधिकारियों का कहना है कि समय पर शिकायत मिलने से राशि को सुरक्षित रखने में सफलता मिली, जिससे पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया आसान होगी।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में तुरंत शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि शुरुआती घंटों में कार्रवाई से धनराशि को फ्रीज कराने की संभावना अधिक रहती है।
1 करोड़ रुपये के मोबाइल किए ब्लॉक
जांच के दौरान पुलिस ने ऐसे मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की पहचान की, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। तकनीकी जांच के आधार पर करीब 1 करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन ब्लॉक किए गए, ताकि उनका आगे किसी भी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल न हो सके।
इसके साथ ही कई सिम कार्ड, बैंक खाते और डिजिटल भुगतान से जुड़े माध्यमों की भी जांच जारी है।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस उनके पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर की गई, उसका इस्तेमाल कहां हुआ और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी जब्त किए गए उपकरणों की जांच कर रहे हैं, जिससे साइबर ठगी के तरीकों और नेटवर्क की पूरी जानकारी सामने आ सके।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
जयपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, फर्जी निवेश योजना, लॉटरी, केवाईसी अपडेट या बैंक अधिकारी बनकर की जाने वाली कॉल पर भरोसा न करें। किसी भी स्थिति में अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या कार्ड संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट करें। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को होल्ड कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
जयपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और डिजिटल माध्यम से लोगों को ठगने वाले गिरोहों पर लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।








