दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में कुछ ही घंटों के अंतराल पर आए भूकंपों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहले क्यूबा में शक्तिशाली भूकंप ने धरती को हिला दिया और उसके बाद ईरान में भी तेज झटके महसूस किए गए। लगातार आए इन भूकंपों ने लाखों लोगों को दहशत में ला दिया और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास 6.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह झटका इतना शक्तिशाली था कि इसके कंपन क्यूबा से बाहर फ्लोरिडा और मेक्सिको के कुछ हिस्सों तक महसूस किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अपने क्षेत्र में लगभग 150 वर्षों में दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है।
भूकंप के बाद कई इलाकों में लोग घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। राजधानी हवाना सहित पश्चिमी क्यूबा के कई क्षेत्रों में इमारतें हिलती महसूस की गईं। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की जानकारी नहीं मिली है। राहत की बात यह रही कि सुनामी का कोई खतरा घोषित नहीं किया गया।
क्यूबा के बाद ईरान में भी करीब 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। झटके महसूस होते ही लोग एहतियातन खुले स्थानों की ओर भागे। स्थानीय एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
भूकंप विज्ञानियों का कहना है कि क्यूबा और ईरान में आए इन भूकंपों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है। दोनों घटनाएं अलग-अलग भूगर्भीय क्षेत्रों में हुई हैं और इनके पीछे अलग टेक्टोनिक गतिविधियां जिम्मेदार हैं। फिर भी कुछ घंटों के भीतर दो देशों में आए शक्तिशाली झटकों ने वैश्विक स्तर पर चर्चा छेड़ दी है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बड़े भूकंपों के बाद आफ्टरशॉक्स (अनुवर्ती झटके) आने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में लोगों को अफवाहों से बचने, आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।








