भरतपुर। शहर के प्रमुख खेल परिसर लोहागढ़ स्टेडियम की बदहाल स्थिति इन दिनों खिलाड़ियों, सेना और अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ-साथ महिलाओं और बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 20-25 दिन पहले हुई बारिश के बाद भी स्टेडियम परिसर और आसपास के रास्तों से पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया है। कई हिस्सों में अब भी जलभराव बना हुआ है। जमा पानी के साथ गंदगी और दुर्गंध ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
स्टेडियम में रोजाना बड़ी संख्या में युवा रनिंग और शारीरिक अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। लेकिन मैदान और रास्तों में पानी भरा होने के कारण उनकी नियमित ट्रेनिंग प्रभावित हो रही है। खास तौर पर अग्निवीर और सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के सामने समस्या गंभीर हो गई है, क्योंकि दौड़ और शारीरिक अभ्यास उनकी तैयारी का अहम हिस्सा हैं।

युवाओं की तैयारी पर सीधा असर
लोहागढ़ स्टेडियम में सुबह के समय बड़ी संख्या में युवा दौड़ लगाने और फिटनेस की तैयारी करने पहुंचते हैं। कई युवा सेना, अग्निवीर और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी शारीरिक तैयारियों के लिए इसी मैदान पर निर्भर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए रोजाना का अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यदि मैदान लंबे समय तक इस्तेमाल करने लायक नहीं रहे तो उनकी तैयारी प्रभावित होना स्वाभाविक है। कई युवाओं को पानी और कीचड़ के कारण अभ्यास के लिए दूसरे स्थान तलाशने पड़ रहे हैं।

खिलाड़ी भी परेशान, कई खेल गतिविधियां प्रभावित
जलभराव का असर केवल रनिंग करने वाले युवाओं तक सीमित नहीं है। स्टेडियम परिसर में बैडमिंटन, बास्केटबॉल, कुश्ती, सॉफ्टबॉल और कबड्डी समेत विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी प्रभावित बताए जा रहे हैं।
खेल परिसरों तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास पानी जमा होने के कारण खिलाड़ियों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। इससे नियमित अभ्यास का कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है। खिलाड़ियों और अभिभावकों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने से बच्चों की खेल गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

गंदे पानी और दुर्गंध ने बढ़ाई परेशानी
कई दिनों से जमा पानी अब गंदा और दुर्गंधयुक्त हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेडियम के कुछ हिस्सों में गंदगी भी जमा है, जिससे वातावरण असुविधाजनक हो गया है।
जो लोग किसी तरह स्टेडियम तक पहुंच रहे हैं, उन्हें पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में लोगों को कपड़े और जूते खराब होने के साथ स्वच्छता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंदे पानी वाले रास्तों से गुजरना विशेष रूप से मुश्किल बताया जा रहा है।
महिलाएं और बुजुर्ग भी नहीं पहुंच पा रहे
लोहागढ़ स्टेडियम केवल खिलाड़ियों और युवाओं के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। यहां बड़ी संख्या में महिलाएं योग और फिटनेस गतिविधियों के लिए आती हैं, जबकि बुजुर्ग मॉर्निंग वॉक के लिए स्टेडियम का इस्तेमाल करते हैं।
जलभराव और कीचड़ के कारण कई लोगों की नियमित दिनचर्या प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रास्ते में पानी देखकर कुछ लोग वापस लौट जाते हैं। इससे स्टेडियम का नियमित उपयोग करने वाले हर आयु वर्ग के लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
राहुल मदेरणा ने उठाया मुद्दा
स्टेडियम में नियमित रूप से वॉक और रनिंग करने वाले राहुल मदेरणा ने जलभराव और स्टेडियम की बदहाल व्यवस्था पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति या किसी एक खेल से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि स्टेडियम से जुड़े हर वर्ग को इसका सामना करना पड़ रहा है।
मदेरणा ने कहा कि बच्चों और युवाओं के भविष्य के लिए बनाए गए स्टेडियम में अगर बच्चे और खिलाड़ी ही नियमित अभ्यास नहीं कर पा रहे हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
सबसे बड़ा सवाल- 20-25 दिन बाद भी पानी क्यों नहीं निकला?
स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि बारिश के इतने दिन बाद भी स्टेडियम से पानी की निकासी क्यों नहीं हो पाई। लोगों का कहना है कि हर बार बारिश के बाद यदि इसी तरह जलभराव होता है तो केवल पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है।
इसके लिए बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, नियमित सफाई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जरूरत है। लोगों का कहना है कि यदि जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो अगली बारिश में फिर यही समस्या खड़ी हो सकती है।
प्रशासन से तत्काल निरीक्षण और स्थायी समाधान की मांग
राहुल मदेरणा समेत स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से स्टेडियम का मौके पर निरीक्षण कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि सबसे पहले जमा पानी को निकाला जाए और इसके बाद पूरे परिसर की सफाई कराई जाए।
इसके साथ ही स्टेडियम तक आने-जाने वाले रास्तों को भी दुरुस्त करने और भविष्य में जलभराव की समस्या न हो, इसके लिए स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग उठाई गई है।
‘सिर्फ पानी निकालना काफी नहीं’
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा समस्या का समाधान केवल जमा पानी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। स्टेडियम की नियमित देखरेख, साफ-सफाई और बारिश के पानी की निकासी के लिए स्थायी इंतजाम जरूरी हैं।
लोहागढ़ स्टेडियम भरतपुर के लिए महज एक मैदान नहीं है। यहां बच्चे खेलों में अपना भविष्य तलाशते हैं, युवा सेना और अग्निवीर भर्ती की तैयारी करते हैं, खिलाड़ी नियमित अभ्यास करते हैं और महिलाएं-बुजुर्ग स्वास्थ्य एवं फिटनेस के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में लोगों का कहना है कि स्टेडियम की बदहाली को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या का संज्ञान लेकर कब तक पानी की निकासी, सफाई और स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था की दिशा में ठोस कदम उठाता है।
स्थानीय लोगों की मांग साफ है—लोहागढ़ स्टेडियम को जल्द से जल्द साफ, सुरक्षित और उपयोगी बनाया जाए, ताकि भरतपुर के बच्चे खेल सकें, युवा अपने भविष्य की तैयारी कर सकें और आम लोग बिना परेशानी के इसका इस्तेमाल कर सकें।








