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August 26, 2026 10:00 pm

टॉक्सिक मूवी रिव्यू: यश के स्वैग और जबरदस्त एक्शन का दमदार डोज

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निर्देशक: गीतू मोहनदास

कलाकार: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत
अवधि: 3 घंटे 14 मिनट
रेटिंग: 4

यश की फिल्म का इंतजार उनके फैंस लंबे समय से कर रहे थे और अब टॉक्सिक के साथ वह इंतजार खत्म हो गया है। फिल्म की शुरुआत से ही समझ आ जाता है कि यह सिर्फ एक गैंगस्टर कहानी नहीं है। इसमें एक्शन है, परिवार है, रिश्ते हैं और एक ऐसी दुनिया है, जिसे निर्देशक गीतू मोहनदास ने अपने अंदाज में तैयार किया है। फिल्म का ट्रीटमेंट काफी अलग है और बड़े पर्दे पर इसके कई सीन खास असर छोड़ते हैं। ओणम और ईद-ए-मिलाद के मौके पर रिलीज हुई यह फिल्म यश के फैंस के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है।

टॉक्सिक की कहानी एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां ताकत और परिवार दोनों की अपनी जगह है। यहां हर किरदार के पीछे एक कहानी है और हर रिश्ते के साथ कुछ न कुछ जुड़ा हुआ है। गीतू मोहनदास ने गैंगस्टर कहानी को सिर्फ बंदूक और लड़ाई तक सीमित नहीं रखा है। फिल्म में रिश्तों और भावनाओं को भी जगह दी गई है, जिससे कहानी को एक अलग रंग मिलता है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश हैं। इस फिल्म में यश दो किरदारों में नजर आते हैं — राया और उसका बेटा टिकट। दोनों किरदारों में उनका अंदाज अलग है और यही चीज फिल्म को दिलचस्प बनाती है। यश की एंट्री, उनका लुक, संवाद और एक्शन सीन फिल्म के बड़े आकर्षण हैं। वह पर्दे पर आते हैं तो कहानी अपने आप तेज हो जाती है। यश ने अपने किरदार में एक्शन के साथ भावनाओं को भी अच्छी तरह दिखाया है।

फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत भी अहम भूमिकाओं में हैं। इन सभी किरदारों को कहानी में अपनी जगह मिली है। खासकर नयनतारा का किरदार फिल्म के परिवार वाले हिस्से को मजबूत करता है। वहीं बाकी किरदार कहानी में चल रहे ताकत के खेल को आगे बढ़ाते हैं। महिला किरदार सिर्फ नायक के आसपास दिखाई नहीं देते, बल्कि कहानी को आगे ले जाने में उनका भी योगदान है।

टॉक्सिक का एक और मजबूत पक्ष इसका विजुअल ट्रीटमेंट है। फिल्म की दुनिया सामान्य गैंगस्टर फिल्मों से काफी अलग दिखाई देती है। सेट, कपड़े, रोशनी और कैमरे का इस्तेमाल कहानी के माहौल को और बेहतर बनाता है। एक्शन सीन बड़े स्तर पर फिल्माए गए हैं और यश इन दृश्यों में पूरी तरह फिट बैठते हैं। अगर आप बड़े पर्दे पर एक्शन देखना पसंद करते हैं, तो फिल्म के कई सीन आपको पसंद आएंगे।

फिल्म में परिवार और रिश्तों की कहानी भी साथ-साथ चलती है। अपराध की दुनिया के बीच भरोसा, प्यार और वफादारी जैसे भाव कहानी का अहम हिस्सा हैं। यही वजह है कि टॉक्सिक सिर्फ एक एक्शन फिल्म बनकर नहीं रह जाती। यश के किरदार के भावनात्मक हिस्से कहानी को एक अलग दिशा देते हैं और फिल्म में एक संतुलन बनाए रखते हैं।

हालांकि फिल्म की लंबाई कुछ जगह परेशानी बनती है। 3 घंटे 14 मिनट का रनटाइम काफी ज्यादा है और कुछ हिस्से थोड़े लंबे लगते हैं। कई दृश्यों को छोटा किया जा सकता था, जिससे कहानी की रफ्तार और बेहतर रहती। कुछ जगह फिल्म अपनी दुनिया को दिखाने में ज्यादा समय लेती है और इससे कहानी थोड़ी धीमी हो जाती है। अगर एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई होती, तो फिल्म का असर और मजबूत हो सकता था।

गीतू मोहनदास ने एक आम गैंगस्टर फिल्म बनाने के बजाय अपनी अलग दुनिया बनाने की कोशिश की है। फिल्म हर जगह एक जैसी असरदार नहीं है, लेकिन इसमें कुछ नया करने की कोशिश साफ दिखाई देती है। यही इसकी खासियत भी है। फिल्म आपको एक अलग माहौल में ले जाती है और यश उस दुनिया के सबसे बड़े आकर्षण बने रहते हैं।

कुल मिलाकर, टॉक्सिक एक बड़े पर्दे की फिल्म है, जिसमें यश का दमदार अंदाज, शानदार एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा और परिवार की कहानी एक साथ देखने को मिलती है। फिल्म थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन इसमें कई ऐसे पल हैं जो दर्शकों को जोड़े रखते हैं। अगर आप यश के फैन हैं और बड़े स्तर की एक्शन फिल्म देखना पसंद करते हैं, तो टॉक्सिक आपको निराश नहीं करेगी।

Sanjeevni Today
Author: Sanjeevni Today

Reporter

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