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April 21, 2026 11:09 pm

बिना कोचिंग और सुविधाओ के अभाव में राजुराम का आरएएस में चयन, युवा के लिए बनें प्रेरणा स्त्रोत

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प्रदेश में 2285 व एसटी वर्ग में 05 वीं रैंक की हासिल

सिरोही। कहते हैं कि मन में कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा मजबूत हो तो सफलता क़दमो को चुमती है। एक ऐसी सफलता को चरितार्थ करते हुए बरवा की ढाणी में निवासरत राजूराम मीणा ने बिना कोचिंग और सुविधाओ के बावजूद भी आरएएस 2024 में पहले प्रयास में सफल हो गए। ऐसे में उन्होंने प्रदेश भर में 2285 और एसटी एक्स सर्विसमैन में 05 वीं रैंक हासिल कर गांव और समाज का नाम रोशन किया। बरवा और घाणा के ग्रामीण बताते हैं कि राजूराम एक गरीब और साधारण परिवार पले बड़े हैं, वें आज भी बरवा गांव की ढाणी में परिवार के साथ निवासरत हैं, जहां पर न मूलभूत सुविधाएं पूर्ण है और ना ही शिक्षा का माहौल, इसके बावजूद भी आरएएस में चयनित होकर पूरे जनजाति समुदाय और युवाओ के लिए प्रेरणादायक बनकर उभरे हैं।

राजूराम आरएएस में सिलेक्शन होने का श्रेय माता- पिता और समय- समय पर मार्गदर्शन प्रदान करने वाले मित्रों को देते है। फिलहाल राजूराम के निवास स्थान पर ग्रामीण और समाज के लोग पहुंचकर माला व साफा पहनाकर बधाईयां दे रहे हैं और परिवार में खुशियों का माहौल छाया हुआ है। वहीं राजूराम के घर में आज भी भेड़-बकरियों का पालन करते हैं और परिवार के लोग आज भी भेड़-बकरियों को लेकर जंगल में चारागाह के लिए लेकर जाते हैं और इसी से परिवार का पालन-पोषण भी होता है।

राजुराम की अधिकतर पढ़ाई सरकारी स्कूलों में ही हुई

स्वयं राजूराम बताते हैं कि उनकी प्राथमिक स्तर की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई और आगे की उच्चतम शिक्षा के लिए ग्राम पंचायत मुख्यालय घाणा में स्थित सरकारी स्कूल में अध्ययन किया। वें इस दौरान निरंतर पढ़ाई को जारी रखने के लिए राजूराम स्वयं बिना किसी संसाधन के पैदल ही 8 किलोमीटर दूर स्कूल तक रोजाना सफर तय करते थे। इस बीच राजूराम ने कड़ा संघर्ष करते हुए कॉलेज स्तर की शिक्षा के लिए जालौर में दाखिला लिया। जहां पर वें जनजाति छात्रावास में रहकर पूरी पढ़ाई कर नौकरी योग्य बनें फिर वायुसेना में शामिल हुए।

20 साल तक वायुसेना में दी सेवाएं, अब देंगे प्रशासनिक सेवाएं

राजूराम मीणा ने 20 वर्ष तक वायुसेना में अलग-अलग जगहों पर सेवाएं दी। वें हाल में जून माह में सेवानिवृत्त होकर घर आए हैं, लेकिन राजूराम ने प्रशासनिक सेवा में जाने को लेकर लक्ष्य के प्रति दृढ़ इच्छा को मजबूत रखीं और किताबों से वास्ता रखा।जिसके चलते वें आज लक्ष्य प्रति सफल होने कामियाब हों गए।

राजुराम युवाओ के लिए बनें प्रेरणा स्त्रोत

राजूराम अनुसूचित जनजाति में जालौर जिले से पहली बार सीधे आरएएस अधिकारी बने हैं। अब तक जालौर जिले में अनुसूचित जनजाति से आज तक कोई कोई सीधे आरएएस नहीं बन पाया। अनुसूचित जनजाति में पहली बार जालौर जिले से आरएएस में चयनित होने पर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी कर रहे युवा राजुराम को इस क्षेत्र में प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक के रूप देख रहे हैं।

इनका कहना है

मैं और राजूराम पहले साथ -साथ पढ़ते थे, उस दौरान राजूराम की आर्थिक स्थिति बहुत दहनीय थी, इसके बावजूद बरवा और घाणा तक की स्कूल में रोजाना पैदल सफर तय करते थे और पढ़ाई भी हौसियार थे। राजुराम ने आरएएस चयनित होने पर पूरे गांव नाम रोशन किया।

कानाराम मीना
प्रशासक, ग्राम पंचायत घाणा

इनका कहना है

राजुराम का आरएएस में चयन होने पर बरवा गांव के लिए खुशी और गर्व की बात है। आने वाले समय राजूराम युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत और मार्गदर्शन बनेंगे।

रामसिंह चम्पावत
पूर्व सरपंच, बरवा

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