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October 27, 2026 4:25 pm

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करवा चौथ पर पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? सरगी से लेकर पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने तक जानें नियम

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करवा चौथ का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। इस अवसर पर सरगी खाने से लेकर पूजा करने और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने तक कई परंपराओं का पालन किया जाता है। हालांकि, कभी-कभी ऐसी स्थिति बन जाती है कि व्रत के दिन या उससे ठीक पहले महिलाओं को मासिक धर्म शुरू हो जाता है। ऐसे में उनके मन में यह सवाल उठता है कि क्या पीरियड्स के दौरान करवा चौथ का व्रत रखा जा सकता है, पूजा कैसे करनी चाहिए और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि क्या होगी। धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में महिलाएं अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार व्रत रख सकती हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और धार्मिक परंपराओं में पूजा-पाठ को लेकर मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं।

पंचांग के अनुसार, इस बार करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर महिलाएं कई दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर देती हैं। नए कपड़े, सोलह श्रृंगार, पूजा की थाली और सरगी की तैयारियों के बीच यदि मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो कई महिलाएं असमंजस में पड़ जाती हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक भय या अपराधबोध रखने की आवश्यकता नहीं है। महिलाएं अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्रत रखने या उसमें बदलाव करने का निर्णय ले सकती हैं। विशेष रूप से निर्जला व्रत रखते समय स्वास्थ्य और शरीर की जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है।

पीरियड्स में करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म के दौरान भी महिलाएं करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना कर सकती हैं। कुछ परिवारों में इस दौरान पूजा की सामग्री और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से परहेज किया जाता है। ऐसी परंपराओं का पालन करने वाली महिलाएं अपने पति या परिवार के किसी अन्य सदस्य की सहायता से पूजा की व्यवस्था कर सकती हैं। वहीं, कई परिवारों में मासिक धर्म के दौरान धार्मिक गतिविधियों को लेकर अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इसलिए महिलाएं अपने परिवार की परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार निर्णय ले सकती हैं। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि मासिक धर्म के कारण व्रत रखने या पूजा करने की क्षमता पर कोई चिकित्सकीय प्रतिबंध नहीं होता, लेकिन शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पीरियड्स के दौरान पूजा-पाठ के क्या हैं नियम?

करवा चौथ के अवसर पर महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को करवा माता की पूजा करने के बाद कथा सुनती हैं। कुछ पारंपरिक मान्यताओं में मासिक धर्म के दौरान पूजा की थाली, करवा और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को सीधे स्पर्श करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि कोई महिला अपने परिवार की परंपरा के अनुसार इन नियमों का पालन करना चाहती है, तो वह परिवार के किसी सदस्य की सहायता से पूजा की सामग्री व्यवस्थित करवा सकती है। वह पूजा के समय उपस्थित रहकर कथा सुन सकती है और मन ही मन प्रार्थना कर सकती है। हालांकि, मासिक धर्म के दौरान पूजा करने पर रोक को सभी हिंदू परंपराओं में एक समान नियम नहीं माना जाता। इसलिए किसी महिला को इस प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण स्वयं को दोषी या अशुद्ध महसूस करने की आवश्यकता नहीं है।

पीरियड्स में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने पति का चेहरा देखकर व्रत खोलती हैं। यदि मासिक धर्म के दौरान कोई महिला पूजा की सामग्री को स्पर्श करने से परहेज करती है, तो वह अपने पति या परिवार के किसी सदस्य से लोटे में जल भरवाकर अर्घ्य दिलवा सकती है। इस दौरान वह पास खड़े होकर हाथ जोड़कर चंद्र देव से प्रार्थना कर सकती है। कुछ परिवारों में शाम को स्नान करने के बाद स्वयं अर्घ्य देने की परंपरा भी है। इन तरीकों को धार्मिक मान्यताओं और पारिवारिक परंपराओं के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं पर लागू किसी सार्वभौमिक धार्मिक नियम के रूप में।

यदि करवा चौथ के दिन किसी महिला को मासिक धर्म शुरू हो जाता है, तो वह अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रख सकती है और व्रत कथा सुन सकती है। उन्होंने पारंपरिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में पूजा की सामग्री को सीधे स्पर्श करने से परहेज किया जा सकता है और शाम को स्नान के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जा सकता है। हालांकि, इस विषय पर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग मत प्रचलित हैं।

शादी का पहला करवा चौथ हो और पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें?

शादी के बाद पहला करवा चौथ कई महिलाओं के लिए भावनात्मक रूप से खास होता है। इस दिन को यादगार बनाने के लिए महिलाएं विशेष तैयारियां करती हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखती हैं। ऐसे में यदि पहले करवा चौथ पर मासिक धर्म शुरू हो जाए, तो उन्हें चिंता होने लगती है कि इससे व्रत या पूजा पर कोई प्रभाव पड़ेगा या नहीं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं चाहें तो अपनी श्रद्धा के साथ व्रत जारी रख सकती हैं, सोलह श्रृंगार कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं। यदि उनके परिवार में मासिक धर्म के दौरान पूजा की सामग्री को स्पर्श न करने की परंपरा है, तो वे पति या परिवार की किसी अन्य महिला की सहायता ले सकती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन करने और पति की लंबी उम्र की कामना करने के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत खोल सकती हैं। हालांकि, व्रत रखना अनिवार्य नहीं है और स्वास्थ्य या असुविधा की स्थिति में अपनी जरूरतों को प्राथमिकता देना उचित है।

पीरियड्स में सरगी खाने के क्या नियम हैं?

करवा चौथ के व्रत की शुरुआत आमतौर पर सुबह सूर्योदय से पहले सास की ओर से दी गई सरगी खाने से होती है। सरगी में फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, ताकि दिनभर व्रत रखने के लिए शरीर को ऊर्जा मिल सके। यदि सरगी खाने के समय मासिक धर्म चल रहा हो, तो कुछ पारंपरिक परिवारों में पूजा की थाली या रसोई के बर्तनों को सीधे स्पर्श करने से परहेज किया जाता है। ऐसी स्थिति में महिला अपने पति या परिवार के किसी सदस्य की मदद से सरगी ले सकती है। हालांकि, मासिक धर्म के दौरान भोजन को छूने या खाने पर कोई चिकित्सकीय रोक नहीं है। सरगी का उद्देश्य व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा देना है, इसलिए भोजन और पानी के संबंध में अपनी शारीरिक जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है।

करवा चौथ के दौरान मासिक धर्म शुरू होना एक सामान्य शारीरिक स्थिति है। ऐसे में महिलाओं को घबराने या स्वयं को दोषी मानने की आवश्यकता नहीं है। धार्मिक रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए महिलाएं अपनी आस्था और परंपराओं के अनुरूप निर्णय ले सकती हैं। साथ ही, निर्जला व्रत के दौरान कमजोरी, चक्कर या अस्वस्थता महसूस होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। व्रत का मूल भाव प्रेम, श्रद्धा और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना है, इसलिए इसे अनावश्यक भय या दबाव के साथ जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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