23 अक्टूबर को चंद्रमा के मीन राशि में प्रवेश करने से एक बेहद अशुभ योग का निर्माण हुआ है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में ‘विष योग’ कहा जाता है। चंद्रमा अपनी इस यात्रा के दौरान 25 अक्टूबर तक मीन राशि में ही विराजमान रहेंगे, जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर साफ तौर पर दिखाई देगा। इस समयावधि के दौरान चंद्रमा और शनि का यह नकारात्मक संयोग कई लोगों के व्यक्तिगत जीवन, करियर, कारोबार, और पारिवारिक रिश्तों पर भारी पड़ सकता है। विशेष रूप से जिन लोगों की जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हैं या विष योग का प्रभाव है, उन्हें इस दौरान बेहद सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मीन, मिथुन और धनु राशि के जातकों को इस विशेष कालखंड में संभलकर चलने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह 53 घंटे का समय मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर का विशेष स्थान है और चंद्रमा की चाल हमारे जीवन पर गहरा असर डालती है। पंचांग के अनुसार, 23 अक्टूबर को दोपहर के समय चंद्रमा ने कुंभ राशि छोड़कर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश किया था, जहां वे 25 अक्टूबर की शाम तक रहेंगे। वर्तमान समय में शनि भी इसी मीन राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं। इस प्रकार गुरु की राशि में शनि और चंद्रमा के एक ही स्थान पर आने से शक्तिशाली ‘विष योग’ बना है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत अशुभ माना जाता है। जानकारों के मुताबिक, शनि जहां व्यक्ति के कर्म, अनुशासन और जीवन की कठोर वास्तविकताओं के प्रतीक हैं, वहीं चंद्रमा हमारे मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन को नियंत्रित करते हैं। इन दोनों ग्रहों की युति व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को भ्रमित कर सकती है और मानसिक अशांति को बढ़ा सकती है।
इस कठिन अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की जल्दबाजी से बचना और अपने सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूरी सूझबूझ के साथ लेना ही बुद्धिमानी होगी। पेशेवर जीवन में अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने के बजाय उन्हें पूरी निष्ठा से निभाना इस गोचर के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है। चंद्रमा का यह सफर 25 अक्टूबर की शाम को मेष राशि में प्रवेश के साथ समाप्त होगा, लेकिन तब तक के लिए सभी जातकों को अपने कामकाज और आर्थिक मामलों को लेकर अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। इस अशुभ योग के दुष्प्रभावों से बचने और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में शिवपूजन को अत्यंत प्रभावी माना गया है, इसलिए इस काल में भगवान शिव की आराधना करना विशेष फलदायी साबित हो सकता है।








