23 मई को विश्व भर के बहाई समुदाय द्वारा बाब का उद्घोषणा दिवस बड़े ही भक्ति, आनंद और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन बहाई धर्म की नींव रखने वाला ऐतिहासिक दिन है।
बाब (सैयद अली मुहम्मद शिराजी) ने 23 मई 1844 को शिराज (ईरान) में अपनी दिव्य उद्घोषणा की थी। उन्होंने घोषणा की कि वे “बाब” (द्वार) हैं — अर्थात् ईश्वर के अगले महान अवतार (जिसे बाद में बहाउल्लाह कहा गया) के आने का द्वार। इस उद्घोषणा ने मानव इतिहास में एक नई आध्यात्मिक युग की शुरुआत की।
उनकी उद्घोषणा ने ईरान सहित पूरी दुनिया में हलचल मचा दी। उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और धार्मिक कट्टरता का विरोध किया तथा स्त्री-पुरुष समानता, शिक्षा, न्याय और मानव एकता पर जोर दिया। उनकी शिक्षाओं ने बाद में बहाई धर्म की नींव रखी।
दुर्भाग्यवश, पुराने धार्मिक नेताओं और ईरानी सरकार के विरोध के कारण उन्हें 1850 में मात्र 30 वर्ष की आयु में तबरेज़ में गोली से मार दिया गया। उनकी शहादत के बावजूद उनकी शिक्षाएं आज भी लाखों लोगों को प्रेरणा दे रही हैं।
उद्घोषणा का महत्व
बाब ने अपनी उद्घोषणा में कहा था कि मानवता अब एक नये युग में प्रवेश कर रही है। उन्होंने शिक्षा, विज्ञान, महिलाओं के अधिकार, विश्व शांति, एकता और समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। उनकी शिक्षाएं बाद में बहाउल्लाह द्वारा और विस्तार से दी गईं, जिन्हें आज बहाई धर्म के रूप में जाना जाता है।
यह उद्घोषणा मात्र एक धार्मिक घटना नहीं थी, बल्कि मानवजाति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला एक महान आह्वान था।
आज का उत्सव
भारत सहित दुनिया भर के बहाई समुदाय इस पवित्र दिन पर:
- विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं
- बाब और बहाउल्लाह की शिक्षाओं पर चर्चा करते हैं
- सामुदायिक भोज (सामूहिक भोजन) का आयोजन करते हैं
- युवाओं और बच्चों को बहाई सिद्धांतों से परिचित कराते हैं
बाब की मुख्य शिक्षाएँ
- ईश्वर की एकता
- सभी धर्मों की एकता
- मानव जाति की एकता
- विज्ञान और धर्म का सामंजस्य
- स्त्री-पुरुष की समानता
- पूर्वाग्रहों (राष्ट्र, धर्म, जाति आदि) का त्याग
- विश्व शांति की स्थापना
बाब ने अपनी उद्घोषणा के मात्र 6 वर्ष बाद शहादत प्राप्त की, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा दे रही हैं।








