
“कहो अपनी सम्पत्ति पर गर्व न करो, आज ये तुम्हारी है, कल ये किसी और के पास होगी। सर्वज्ञाता, सर्वविद् तुम्हें इस प्रकार चेतावनी देता

“यदि तुम पर कोई क्रोधित हो जाये तो उसे सज्जनता से उत्तर दो और यदि कोई तुम्हें झिड़के तो भी तुम उसे झिड़कने से बचो।


हे दिव्यवाणी के पुत्र ! अपना मुखड़ा मेरी ओर कर और मेरे अतिरिक्त अ सभी कुछ त्याग दे, क्योंकि मुझ महान की सत्ता शाश्वत उसका

आज का पवित्र लेख: बहाई लेखो से :-

“हे दुनिया के लोगों ! सत्यत: तुम जानो कि एक आदृश्य विपत्ति तुम्हारा पीछा कर रही है और घोर यातना तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है।

है बांधवो! परस्पर सहनशील रहो और हीन वस्तुओं में अनुराग न रखो। अपनी समृद्धि का अहंकार न करो और अनादर में लज्जित न हो। मेरे

हे बांधवो ! परस्पर सहनशील रहो और हीन वस्तुओं में अनुराग न रखो। अपनी समृद्धि का अहंकार न करो और अनादर में लज्जित न हो।

हे धूल की संतानो ! धनिकों को निर्धन की अर्द्धरात्रि की आहों से परिचित कराओ, कहीं प्रमाद उन्हें विनाश के मार्ग पर न पहुंचा दे

हे अस्तित्व के पुत्र ! स्वयं को सांसारिकता में लिप्त न रख, क्योंकि अग्नि से हम स्वर्ण की और स्वर्ण से हम अपने सेवक की
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