प्रतीक यादव की मौत के बाद “पल्मोनरी एम्बॉलिज्म” नाम की बीमारी अचानक चर्चा में आ गई है। डॉक्टरों के मुताबिक यह एक गंभीर और जानलेवा स्थिति होती है, जिसमें शरीर में बना खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में जाकर फंस जाता है। इससे फेफड़ों तक रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है और कई मामलों में मरीज की अचानक मौत भी हो सकती है।
Pulmonary Embolism को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
क्या होता है पल्मोनरी एम्बॉलिज्म?
यह बीमारी तब होती है जब शरीर के किसी हिस्से, खासकर पैरों की नसों में बना खून का थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इसे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) से जुड़ा माना जाता है। जब यह थक्का फेफड़ों की धमनियों में फंस जाता है, तो ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होने लगता है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत पैदा हो सकती है।
क्या हैं इसके लक्षण?
डॉक्टरों के अनुसार पल्मोनरी एम्बॉलिज्म के कई लक्षण हो सकते हैं, जिनमें—
- अचानक सांस फूलना
- सीने में तेज दर्द
- तेज धड़कन
- चक्कर आना
- खांसी के साथ खून आना
- अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी
कुछ मामलों में मरीज को पहले कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते और स्थिति अचानक गंभीर हो जाती है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ लोगों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है, जैसे—
- लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने वाले लोग
- मोटापे से पीड़ित व्यक्ति
- धूम्रपान करने वाले
- हार्ट या ब्लड प्रेशर के मरीज
- हाल ही में सर्जरी करवाने वाले लोग
- लंबे समय तक बेड रेस्ट पर रहने वाले मरीज
इसके अलावा बढ़ती उम्र, तनाव और अनियमित जीवनशैली भी जोखिम बढ़ा सकती है।
कैसे करें बचाव?
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर सावधानी बरतकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए—
- लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें
- नियमित एक्सरसाइज करें
- शरीर को एक्टिव रखें
- पर्याप्त पानी पिएं
- धूम्रपान से दूरी बनाएं
- किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को अचानक सांस लेने में दिक्कत या सीने में दर्द महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
क्यों खतरनाक मानी जाती है यह बीमारी?
पल्मोनरी एम्बॉलिज्म की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई बार इसके लक्षण सामान्य थकान या सांस की समस्या जैसे लगते हैं, जिससे लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। लेकिन इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
प्रतीक यादव की मौत के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर जांच और इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।








