ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने एक नई पहल की तैयारी की है। इस नई नीति के तहत गांवों और दूरदराज के अस्पतालों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को बेहतर सुविधाएं और आकर्षक वेतन देने का प्रस्ताव है। ‘यू कोट, वी पे’ मॉडल के जरिए डॉक्टरों को अपनी अपेक्षित सैलरी बताने का मौका मिलेगा, ताकि अधिक से अधिक चिकित्सक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़ सकें।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गांवों में डॉक्टरों की कमी का सबसे बड़ा कारण बेहतर वेतन, सुविधाओं और करियर ग्रोथ की कमी है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई नीति तैयार की जा रही है, जिससे डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
इस योजना के तहत डॉक्टर अपनी योग्यता, अनुभव और जरूरत के आधार पर वेतन की मांग रख सकेंगे। इसके बाद उपलब्ध बजट और नियमों के अनुसार उन्हें भुगतान किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य है कि दूरदराज के इलाकों में भी मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिल सके और स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर बेहतर हो।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को आगे की पढ़ाई यानी पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) में भी राहत देने की योजना पर काम किया जा रहा है। लंबे समय तक गांवों में सेवा देने वाले चिकित्सकों को PG प्रवेश में अतिरिक्त लाभ या छूट मिलने से उन्हें करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह नीति प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इसका सीधा फायदा ग्रामीण मरीजों को मिलेगा। अभी कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए शहरों का रुख करना पड़ता है।
NHM की इस पहल का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक मजबूत बनाना है। सरकार की कोशिश है कि डॉक्टरों को बेहतर प्रोत्साहन देकर ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी स्थायी तैनाती सुनिश्चित की जाए।
हालांकि, इस नीति को लागू करने से पहले इसके नियम, बजट और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से डॉक्टरों और मरीजों दोनों को फायदा मिलेगा और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।








