पहलगाम हमले में अपने पति को खो चुकी ऐशान्या का दर्द एक बार फिर सामने आया है। इंसाफ और सहारे की उम्मीद लेकर सरकारी दरवाजों तक पहुंची ऐशान्या ने अब अपनी बेबसी जाहिर की है। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए समय मांगा, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।
ऐशान्या के मुताबिक, पति शुभम की मौत के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, और ऐसे समय में उन्हें प्रशासन से सहयोग और संवेदना की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि वह बार-बार अधिकारियों के संपर्क में रहीं, आवेदन दिए, लेकिन सीएम से मुलाकात का समय तय नहीं हो सका।
उनकी आवाज में दर्द साफ झलकता है—“हम सिर्फ अपनी बात रखना चाहते थे, अपनी पीड़ा बताना चाहते थे, लेकिन हमें वह मौका भी नहीं मिला।” यह बयान न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत पीड़ा को दिखाता है, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।
पहलगाम में हुए हमले ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था, जिनमें ऐशान्या का परिवार भी शामिल है। इस घटना के बाद सरकार की ओर से सहायता और कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामले ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए इतना इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि व्यस्त कार्यक्रमों के कारण मुलाकात तय नहीं हो सकी, लेकिन पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जा रही है।
फिलहाल, ऐशान्या न्याय और संवेदना की उम्मीद में लगातार संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि अपनी बात रखने और न्याय पाने का अधिकार चाहिए।
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि क्या पीड़ितों की आवाज वास्तव में सत्ता तक पहुंच पाती है, या फिर वे सिस्टम की भीड़ में कहीं खो जाती हैं।







