प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब वकीलों के एक समूह ने न्यायमूर्ति अजय भनोट के कोर्ट रूम में प्रवेश का विरोध करते हुए जमकर नारेबाजी की और अदालत परिसर के भीतर टेबल व कुर्सियों में तोड़फोड़ की। यह घटना न्यायमूर्ति भनोट द्वारा अदालती कार्यवाही के दौरान एक वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ कथित रूप से किए गए अनुचित व्यवहार और अपमान के विरोध में सामने आई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जैसे ही जज कोर्ट रूम पहुंचे, कई अधिवक्ताओं ने उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
यह विवाद 27 अक्टूबर को हुई एक घटना के बाद गहराया, जिसको लेकर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली को एक ज्ञापन सौंपा था। रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में बार एसोसिएशन ने न्यायमूर्ति भनोट पर एक अधिवक्ता को अपमानित करने और वरिष्ठ अधिवक्ता वी.पी. श्रीवास्तव का मजाक उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया। एसोसिएशन का कहना है कि इस प्रकार का आचरण कानूनी बिरादरी की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
घटनाक्रम के अनुसार, सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) के पीछे की पंक्ति में एक पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर के अधिकारी बैठे थे। जब एक वकील ने अधिकारी से सीट छोड़ने को कहा, तो सरकारी अधिवक्ता ने वकील को डांटते हुए मामले की शिकायत जज से करने की चेतावनी दी। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इसके बाद जब न्यायमूर्ति भनोट कोर्ट रूम में आए, तो उन्होंने उंगली दिखाकर कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और वकील को जेल भेजने का आदेश दे दिया।
एसोसिएशन के पत्र में यह भी दावा किया गया है कि वकील द्वारा माफी मांगने के बावजूद जज ने उन्हें पुलिस अधिकारी से माफी मांगने का निर्देश दिया और साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता वी.पी. श्रीवास्तव का उपहास उड़ाया। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने जज के इस रवैये को अवमाननापूर्ण बताते हुए मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली से मामले का संज्ञान लेने और उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है, जिसके बाद बुधवार को वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा और कोर्ट रूम में तोड़फोड़ की घटना हुई।








