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November 4, 2026 4:13 pm

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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 के रिश्वत और आत्महत्या के मामले में केरल सरकार ने दिए जांच के आदेश

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तिरुवनंतपुरम। केरल के गृह विभाग ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया है। यह मामला वर्ष 2006 का है, जब वे राज्य के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव के पद पर तैनात थे। आरोप है कि उस दौरान उन्होंने सार्वजनिक निर्माण कार्यों के बिलों को पास करने के लिए ठेकेदारों से कथित तौर पर रिश्वत की मांग की थी।

गृह मंत्री रमेश चेन्निथला के कार्यालय ने बुधवार को जानकारी दी कि यह जांच साजन नामक एक ठेकेदार द्वारा दर्ज कराई गई ताजा शिकायत के आधार पर की जाएगी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने भारत और मलेशिया के संयुक्त उद्यम वाले उपक्रम ‘पार्टी-बेल’ (PATI-BEL) के तहत हाथ में ली गई एक सड़क परियोजना के मलेशियाई प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन से दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। इस परियोजना से जुड़े इंजीनियर ली ने नवंबर 2005 में मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। कथित तौर पर उनके पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर रिश्वत की मांग के चलते भुगतान रोकने का आरोप लगाया गया था।

यह पूरा मामला पहले से ही वीएसीबी के रडार पर था, क्योंकि पिछले महीने कांग्रेस नेता मयंकरीझू वेणुगोपाल ने इस संबंध में गृह मंत्री को एक शिकायत सौंपी थी। वेणुगोपाल का आरोप था कि मलेशियाई इंजीनियर के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम शामिल था और बाहरी दबाव के कारण वर्ष 2006 में हुई वीएसीबी की जांच को प्रभावित कर दिया गया था। गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, वेणुगोपाल की शिकायत के बाद वीएसीबी ने इस मामले की जांच दोबारा शुरू करने को लेकर कानूनी सलाह भी मांगी थी। अब ठेकेदार साजन द्वारा इसी तरह के गंभीर आरोप लगाते हुए एक नई शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद एफआईआर दर्ज करने पर कोई अंतिम निर्णय लेने से पहले इस प्रारंभिक जांच को पूरा किया जाएगा।

गृह मंत्री को 23 अक्टूबर को दी गई अपनी शिकायत में साजन ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ही ली की आत्महत्या के असली कारण थे। उन्होंने कहा कि वे उस संयुक्त उद्यम के लिए सामग्री आपूर्तिकर्ताओं में से एक थे और परियोजना के काम की निगरानी करने वाले दो व्यक्तियों में शामिल थे। उन्होंने प्रोजेक्ट इंजीनियर ली के साथ बेहद करीब से काम किया था। तय समय पर बिल पास न होने के कारण ली स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान नहीं कर पा रहे थे। साजन के मुताबिक, ली ने उन्हें बताया था कि ज्ञानेश कुमार ने उन बिलों को मंजूरी देने के एवज में दो करोड़ रुपये की मांग की थी, लेकिन पार्टी-बेल कंपनी रिश्वत देने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि उस समय ली के परिवार ने कंपनी के कर्मचारियों को बताया था कि उनके सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। कोल्लम के रहने वाले साजन ने कहा कि यदि सरकार इस मामले की जांच के आदेश देती है, तो वे जांचकर्ताओं के सामने ली के परिवार के सदस्यों समेत सभी जरूरी सबूत पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

विधानसभा में दिए गए बयानों के अनुसार, पिछले महीने गृह मंत्री चेन्निथला ने सदन को बताया था कि वर्ष 2006 के सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों की वीएसीबी ने जो जांच शुरू की थी, उसे बाद में बंद कर दिया गया था क्योंकि लगाए गए आरोपों को पुख्ता तौर पर साबित नहीं किया जा सकता था। हालांकि, उस जांच को बीच में ही बंद किए जाने का यह फैसला भी खुद संदेह के घेरे में आ गया था, क्योंकि यह आरोप लगाए गए थे कि किसी भारी दबाव के चलते जांच को बीच रास्ते में ही रोक दिया गया था। चेन्निथला ने कहा था कि चूंकि आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई थी, इसलिए वीएसीबी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए यह सिफारिश की थी कि इस मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2003 से 2006 के बीच बिना किसी तय टेंडर प्रक्रिया का पालन किए कथित तौर पर बांटे गए 76 निर्माण कार्यों से जुड़ी सतर्कता जांच में भी ज्ञानेश कुमार का नाम सामने आया था। वीएसीबी ने उन तमाम कार्यों की जांच शुरू की थी, जिसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगे आरोपों से जुड़ा मामला भी शामिल था। चेन्निथला के अनुसार, चूंकि अनियमितताओं या गड़बड़ियों को पूरी तरह साबित नहीं किया जा सका, इसलिए सतर्कता विभाग ने सभी कानूनी कार्यवाही रोक दी और सरकार को रिपोर्ट सौंप दी कि मामले में आगे कोई और कार्रवाई जरूरी नहीं है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि वर्ष 2012 में इस एजेंसी ने अदालत के सामने आठ मामलों को “तथ्यों की भूल” (mistake of fact) के रूप में रिपोर्ट किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। हालांकि मलेशिया में छोड़े गए उस कथित सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार पर रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाने की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन उस सुसाइड नोट को आज तक कभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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