Explore

Search

November 2, 2026 2:55 pm

महादेव सट्टेबाजी ऐप का सरगना सौरभ चंद्राकर भारत लौटा, 6,000 करोड़ के रैकेट की पूरी कहानी; रवि उप्पल पर एजेंसियों की नजर

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े करीब 6,000 करोड़ रुपये के कथित सट्टेबाजी रैकेट में जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले के प्रमुख आरोपी और कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को रविवार को ओमान से भारत वापस लाया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) लंबे समय से उसकी वापसी के प्रयास कर रहे थे। जून में मस्कट में हिरासत में लिए जाने के बाद से ही उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज कर दी गई थी।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद अब जांच एजेंसियों ने महादेव ऐप के दूसरे सह-संस्थापक रवि उप्पल को दुबई से भारत लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के साथ प्रत्यर्पण को लेकर बातचीत की जा रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का संचालन विदेश में बैठकर किया जा रहा था और इसके तार भारत के कई राज्यों तक फैले हुए थे।

क्या है महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी नेटवर्क?

प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ने 2019-20 के दौरान अपना कथित अवैध कारोबार शुरू किया था। इसके माध्यम से क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के अलावा पोकर और अन्य ताश के खेलों पर भी सट्टा लगाया जाता था। यहां तक कि चुनावी नतीजों पर भी दांव लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती थी।

जांच एजेंसी का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में इस ऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी। इसके बाद इसका नेटवर्क लगातार फैलता गया। छत्तीसगढ़ के भिलाई में छोटे कारोबारी के रूप में काम शुरू करने वाले सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने इस कारोबार को बड़े स्तर तक पहुंचाया।

ईडी के मुताबिक, दोनों प्रमोटर 2019 में अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे। वहां से वे पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करने लगे। भारत में जोखिम वाले कामों को स्थानीय सहयोगियों के हवाले कर दिया गया, जबकि सॉफ्टवेयर, ग्राहकों और पैसों पर मुख्य नियंत्रण विदेश में बैठे प्रमोटरों के पास रहा।

फ्रेंचाइजी मॉडल पर चल रहा था सट्टेबाजी का कारोबार

जांच एजेंसी के अनुसार, महादेव ऐप का नेटवर्क पिरामिड जैसी संरचना में काम करता था। इसमें सट्टेबाजी के पैनल अलग-अलग लोगों को फ्रेंचाइजी की तरह दिए जाते थे। प्रत्येक पैनल का एक संचालक होता था और आमतौर पर उसके साथ चार कर्मचारी काम करते थे।

एक पैनल लेने के लिए करीब 15 लाख रुपये की अग्रिम जमानत राशि जमा करनी पड़ती थी। एक व्यक्ति कई पैनल भी संचालित कर सकता था। पैनल संचालकों की जिम्मेदारी ग्राहकों से बातचीत करने, दांव लगाने के लिए पैसे लेने और जीतने वालों को भुगतान करने की होती थी।

ईडी के अधिकारियों के अनुसार, भारत और संयुक्त अरब अमीरात में ऐसे कम से कम 3,200 सट्टेबाजी पैनल सक्रिय थे। इसके अलावा UAE स्थित मुख्य कॉल सेंटर में करीब 1,000 व्हाट्सऐप ऑपरेटर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसी का दावा है कि प्रत्येक पैनल के मुनाफे का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा मुख्य कार्यालय तक पहुंचाया जाता था। एजेंसी ने इस नेटवर्क की अनुमानित मासिक कमाई करीब 950 करोड़ रुपये बताई है।

94 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन का अनुमान

ईडी की जांच में महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े कुछ अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से करीब 94,000 करोड़ रुपये के लेनदेन का अनुमान सामने आया है। एजेंसी के मुताबिक, इसमें से लगभग 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये प्रमोटरों तक पहुंचाए जा चुके थे।

जांच में यह भी सामने आया कि दुबई स्थित मुख्य कार्यालय में हजारों कर्मचारी काम करते थे। इनमें बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ के भिलाई और आसपास के जिलों के युवाओं की थी।

एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने दुबई में कर्मचारियों के रहने के लिए करीब 20 विला किराये पर ले रखे थे। इन आवासों में लगभग 3,500 कर्मचारी रहते थे। कर्मचारियों में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हें ‘चेकर्स’ कहा जाता था। उनका काम पैनलों के खातों की निगरानी करना और भुगतान में चूक करने वालों की पहचान करना था। ये कर्मचारी 12-12 घंटे की शिफ्ट में काम करते थे।

अब तक 116 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र, 14 गिरफ्तार

महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में ईडी अब तक 116 लोगों के खिलाफ छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। जांच एजेंसी ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार भी किया है। वहीं, सीबीआई महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है और एक मामले में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया जा चुका है, जबकि रवि उप्पल को दुबई से वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण संबंधी प्रयास किए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों प्रमुख आरोपियों से पूछताछ के जरिए इस नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और कथित सहयोगियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

भूपेश बघेल का नाम भी जांच में आया

महादेव ऐप मामले की जांच में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी सामने आया है। सीबीआई ने इस मामले की एफआईआर में उन्हें आरोपी के रूप में नामजद किया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें अब तक किसी आरोपपत्र में आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किया गया है।

ईडी ने अपने एक आरोपपत्र में दावा किया था कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। एजेंसी ने अगस्त 2023 में बघेल के सलाहकार विनोद वर्मा के आवास पर भी तलाशी ली थी।

हालांकि, भूपेश बघेल इन सभी आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी को महादेव ऐप मामले की जांच में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों का अगला बड़ा लक्ष्य रवि उप्पल को भारत लाना है, ताकि कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के पूरे संचालन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर