उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी स्वीकार नहीं की। बुधवार, 4 नवंबर को आए इस फैसले के बाद मामले में जांच का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने पति पर धोखाधड़ी, मारपीट, मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक टिप्पणी, धमकी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। रेखा आर्या का आरोप था कि उनके पति ने अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाकर उनसे विवाह किया था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों के जरिए उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने की कोशिश की गई। इसके अलावा, रेखा आर्या ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए जान से मारने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया था। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया।
हाईकोर्ट में पति ने दी थी ये दलील
एफआईआर रद्द कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए गिरधारी लाल साहू ने नैनीताल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि रेखा आर्या और उनकी शादी जुलाई 2004 में हुई थी और दोनों करीब 22 वर्षों से साथ रह रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को घरेलू विवाद बताते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया था।
वहीं, रेखा आर्या और राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। उनकी तरफ से दलील दी गई कि मामले में लगाए गए आरोप सामान्य वैवाहिक विवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें गंभीर आपराधिक मामले भी शामिल हैं।
अदालत ने क्यों खारिज की याचिका?
न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले में लगाए गए आरोपों को केवल वैवाहिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, मारपीट, दस्तावेजों की कथित जालसाजी, जातिसूचक अपमान और आपराधिक साजिश जैसे आरोपों की जांच जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शादी को 22 साल हो जाने मात्र से बाद में कथित रूप से हुए अपराधों को खारिज नहीं किया जा सकता। ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की सत्यता जांच तथा मुकदमे के दौरान परखी जाने वाली बातें हैं। इस स्तर पर अदालत विस्तृत सुनवाई यानी मिनी ट्रायल नहीं कर सकती।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने गिरधारी लाल साहू की याचिका खारिज कर दी और एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद गिरधारी लाल साहू के खिलाफ दर्ज मामले में कानूनी प्रक्रिया और जांच आगे बढ़ेगी। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। मामले की जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
इस फैसले ने उत्तराखंड की राजनीति में भी रेखा आर्या और उनके पति के बीच चल रहे विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।








