देश में तेजी से बढ़ रही हेल्थ एंग्जायटी यानी स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक चिंता ने अब सरकार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। लगातार बढ़ते मानसिक तनाव, सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं की भरमार और छोटी-छोटी शारीरिक समस्याओं को लेकर लोगों में बढ़ती घबराहट को देखते हुए सरकार ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हेल्थ एंग्जायटी एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित रहता है, भले ही उसे कोई गंभीर बीमारी न हो। बार-बार जांच करवाना, इंटरनेट पर लक्षण खोजते रहना और सामान्य लक्षणों को गंभीर बीमारी समझ लेना इसके प्रमुख संकेत हैं।
सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि डिजिटल युग में जानकारी की अधिकता भी कई बार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रही है। खासकर ऑनलाइन उपलब्ध अधूरी या गलत जानकारी लोगों में डर और भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है।
नई गाइडलाइंस में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने, सही जानकारी तक पहुंच सुनिश्चित करने और अनावश्यक मेडिकल टेस्ट से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि लोगों को अपने लक्षणों के लिए केवल विश्वसनीय डॉक्टरों से ही सलाह लेनी चाहिए और इंटरनेट पर उपलब्ध अनौपचारिक जानकारी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके अलावा योग, ध्यान और नियमित व्यायाम को भी मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी बताया गया है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि युवाओं में शुरुआती स्तर पर ही जागरूकता विकसित की जा सके।
कुल मिलाकर, हेल्थ एंग्जायटी आज के समय की एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या बनती जा रही है। सरकार की नई गाइडलाइंस इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं, जो लोगों को मानसिक शांति और संतुलित जीवन की ओर प्रेरित करने में मदद कर सकती हैं।







