Explore

Search

May 31, 2026 10:08 pm

बाबूलाल की दर्दनाक कहानी: 4 साल से बिस्तर पर, पत्नी पराठे का ठेला लगाकर चला रही परिवार

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

दो छोटे बच्चों समेत परिवार की जिम्मेदारी पिंकी पर,खुद भी किडनी संक्रमण से है ग्रसित

जयपुर। राजस्थान के दौसा जिले के निवासी बाबूलाल बैरवा की जिंदगी चार साल पहले एक भयानक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। हाल जगतपुरा, जयपुर निवासी बाबूलाल मिट्टी में दब जाने की वजह से गंभीर चोटिल होने के बाद वे अब खड़े भी नहीं हो पाते। व्हीलचेयर पर जीवन बसर कर रहे बाबूलाल का परिवार आज आर्थिक संकट और स्वास्थ्य समस्याओं की दोहरी मार झेल रहा है।

हादसा और उसके बाद की जद्दोजहद:-
लगभग चार साल पहले बाबूलाल महेन्द्रा सेज में कार्य करते हुए मिट्टी के ढेर में दब गए थे। दबने को बाद एलएनटी मशीन में निकाला तो मशीन का पंजा कमर पर जा लगा और बाबूलाल इस गंभीर हादसे का शिकार हो गए , जिसके चलते उनकी कमर और पैरों की नसों-नाड़ियों को काफी नुकसान पहुंचा। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति ऐसी है कि वे अब खुद खड़े होने या चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। हादसे के बाद से वे लगातार बेड रेस्ट पर हैं और व्हीलचेयर ही उनकी एकमात्र सहारा बनी हुई है।
बाबूलाल दौसा के रहने वाले हैं, लेकिन इलाज और बेहतर सुविधाओं की तलाश में परिवार जयपुर में किराए के मकान में शिफ्ट हो गया। यहां रहने-खाने का खर्च बढ़ गया, जबकि कमाई का कोई स्थायी साधन नहीं बचा।

Video:-

पत्नी की मूक कुर्बानी:-
परिवार की सबसे बड़ी मजबूती और एकमात्र कमाऊ सदस्य बाबूलाल की पत्नी पिंकी बैरवा हैं। दो छोटे बच्चों की मां होने के बावजूद वे रोज सुबह से शाम सांगानेर एयरपोर्ट टर्मिनल-2 के पास पराठे का ठेला लगाती हैं। गर्मी, बारिश, सर्दी—हर मौसम में सड़क किनारे खड़े होकर वे परिवार का पेट पाल रही हैं। उनके हाथों में फुलके सेंकते-सेंकते छाले पड़ जाते हैं, लेकिन वे रुकती नहीं।

सबसे दर्दनाक बात यह है कि बाबूलाल की पत्नी को भी किडनी संबंधी गंभीर बीमारी है। डॉक्टर बार-बार आराम और इलाज की सलाह देते हैं, लेकिन घर में कमाने वाला कोई और नहीं होने के कारण वे मजबूरन मेहनत करती रहती हैं। एक तरफ पति की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घरेलू जिम्मेदारियां, दूसरी तरफ खुद की बीमारी—फिर भी हार नहीं मान रही हैं।

परिवार की मौजूदा स्थिति:-
बाबूलाल 4 साल से बेड रेस्ट, व्हीलचेयर पर निर्भर है जिन्हें नियमित दवाइयों और फिजियोथेरेपी की जरूरत है।
पत्नी किडनी की बीमारी से ग्रस्त है लेकिन पराठे का ठेला लगाकर काम करती है। दो नाबालिग बच्चे है जिनकी पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा है। किराए का मकान, कोई स्थायी आय नहीं, और सरकारी योजनाओं का इंतजार है।

परिवार कई बार स्थानीय प्रशासन और मददगार संगठनों से गुहार लगा चुका है, लेकिन अभी तक पर्याप्त सहायता नहीं मिल सकी है। बाबूलाल की पत्नी कहती हैं, “मेरे पति को हादसे ने बिस्तर पर ला दिया, लेकिन मैं बच्चों के लिए लड़ रही हूं। मेरी भी तबीयत ठीक नहीं, लेकिन मजबूरी है।”
जो भी व्यक्ति या संस्था इस परिवार की मदद करना चाहे, वे परिवार से सीधे संपर्क (8824076318) कर सकते हैं। एक छोटी सी मदद भी इस परिवार की जिंदगी में बड़ी राहत ला सकती है।
इस बार कोड के माध्यम से भी आप अपनी सहायता परिवार तक पहुँचा हैं।

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर