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October 7, 2026 3:56 pm

महंगाई की मार से बढ़ सकती है EMI! RBI ने कीमतों को लेकर किया अलर्ट, फेस्टिव सीजन में खरीदारी घटने की आशंका

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देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ रही है। बढ़ती कीमतों का असर जहां आम लोगों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है, वहीं इसका प्रभाव कर्ज और EMI पर भी देखने को मिल सकता है। RBI की ओर से महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर जारी संकेतों के बीच आशंका जताई जा रही है कि अगर कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बना रहा तो आने वाले समय में लोगों के लिए उधार लेना और उसकी किस्त चुकाना महंगा हो सकता है।

इसका असर ऐसे समय में पड़ सकता है जब देश में फेस्टिव सीजन के दौरान लोग घर, कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य बड़ी खरीदारी की योजना बनाते हैं। ब्याज दरों और महंगाई का दबाव बढ़ने पर परिवार बड़े खर्चों को कुछ समय के लिए टाल सकते हैं।

महंगाई बढ़ने से कैसे बढ़ सकता है EMI का बोझ?

जब महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती है, तो केंद्रीय बैंक के लिए कीमतों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण हो जाता है। ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर बैंक से मिलने वाले लोन पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो नए कर्ज पर ब्याज लागत बढ़ सकती है। वहीं मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI या लोन की अवधि में भी बदलाव हो सकता है। हालांकि, वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, लोन के प्रकार और ग्राहक की शर्तों पर निर्भर करता है।

RBI की नजर महंगाई पर

भारतीय रिजर्व बैंक का एक प्रमुख उद्देश्य कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है। महंगाई में लगातार बढ़ोतरी होने पर घरेलू खर्च और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और दूसरी जरूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से लोगों की खरीदारी क्षमता कम हो सकती है।

महंगाई बढ़ने का मतलब यह भी है कि समान आय में परिवारों को पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में बचत और गैर-जरूरी खरीदारी के लिए उपलब्ध पैसा कम हो सकता है।

फेस्टिव सीजन की खरीदारी पर असर का अंदेशा

त्योहारों के मौसम में बाजारों में आमतौर पर खरीदारी बढ़ जाती है। लोग नए वाहन, मोबाइल, टीवी, फ्रिज, फर्नीचर और दूसरे सामान खरीदते हैं। इन खरीदारी में बड़ी संख्या में लोग बैंक या वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले कर्ज और EMI का इस्तेमाल करते हैं।

यदि महंगाई और ब्याज दरों का दबाव बढ़ता है, तो कुछ उपभोक्ता बड़ी खरीदारी को टाल सकते हैं। इसका असर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर पर पड़ सकता है।

आम आदमी के बजट पर दोहरा दबाव

महंगाई बढ़ने पर एक तरफ रोजमर्रा की चीजों पर खर्च बढ़ता है, वहीं दूसरी तरफ अगर कर्ज की लागत भी बढ़ती है तो EMI के लिए ज्यादा रकम अलग रखनी पड़ सकती है। इससे परिवारों के पास बचत और अन्य खर्चों के लिए कम पैसा बच सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्ज की EMI तुरंत बढ़ जाएगी। EMI में बदलाव पूरी तरह ब्याज दर के प्रकार और बैंक की शर्तों पर निर्भर करता है।

आगे क्या रहेगा महत्वपूर्ण?

आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, RBI की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख काफी महत्वपूर्ण रहेगा। यदि महंगाई का दबाव कम होता है तो ब्याज दरों पर दबाव भी घट सकता है। वहीं कीमतों में लगातार तेजी रहने पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

फिलहाल आम लोगों के लिए संदेश यही है कि महंगाई और ब्याज दरों में बदलाव पर नजर रखना जरूरी है, खासकर उन लोगों के लिए जो घर, कार या किसी अन्य बड़े खर्च के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं। फेस्टिव सीजन में खरीदारी करने वालों के लिए EMI, कुल ब्याज और अपनी मासिक आय-व्यय का हिसाब देखकर फैसला करना महत्वपूर्ण होगा।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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