नई दिल्ली। देश में चुनाव प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जारी सियासी टकराव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार राज्यों में हुए विधान परिषद चुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है। कांग्रेस जहां चुनावों में कथित गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाकर चुनाव आयोग को घेर रही है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की सीटों के लिए हुए चुनावों का जिक्र करते हुए पूछा कि जब मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से कराया गया, तब कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं। दरअसल, इन चुनावों में कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल पाई। प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी को कांग्रेस के चुनावी आरोपों के जवाब में भाजपा के राजनीतिक पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है।
पीएम मोदी ने पूछा- अंदाजा लगाइए, कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी पोस्ट के जरिए कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव कराए गए थे। खास बात यह थी कि इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर के जरिए हुआ था। इसी तथ्य को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि इन चुनावों में कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं। उनका यह सवाल ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस लगातार चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतों की चोरी के आरोप लगा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी को विपक्ष के उन आरोपों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। भाजपा का तर्क है कि जब बैलेट पेपर के जरिए मतदान हुआ, तब भी कांग्रेस को सफलता नहीं मिली। ऐसे में प्रधानमंत्री ने चुनावों के नतीजों का हवाला देकर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल खड़े करने की कोशिश की है। इस बयान के बाद चुनाव प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर जारी बहस और तेज होने की संभावना है।
चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस लगातार हमलावर
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल पिछले कुछ समय से चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान तेज किया है। पार्टी की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावों में अनियमितताओं के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि, भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए विपक्ष के दावों पर सवाल उठाती रही है।
इसी राजनीतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट ने दोनों दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा का कहना है कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी कांग्रेस को कोई सीट हासिल नहीं हुई, इसलिए विपक्ष को अपनी चुनावी हार के लिए व्यवस्था पर सवाल उठाने के बजाय अपने प्रदर्शन पर भी विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग को लगातार उठा रही है।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार, फिर भी चारों सीटें एनडीए के खाते में
विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा झटका कर्नाटक में लगा, जहां वर्तमान में उसी की सरकार है। राज्य में विधान परिषद की चार सीटों के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के गठबंधन ने जीत दर्ज की। भाजपा ने अपनी तीन सीटों पर कब्जा बरकरार रखा, जबकि जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस को हराकर एक सीट अपने नाम कर ली।
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद पार्टी का चारों सीटों पर हार जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन नतीजों ने राज्य में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। भाजपा और जेडीएस के गठबंधन की इस जीत को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की सत्ता में होने के बाद भी पार्टी विधान परिषद की इन सीटों पर सफलता हासिल नहीं कर सकी।
प्रधानमंत्री मोदी के बयान और कर्नाटक समेत चार राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस तथा भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। एक ओर कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रही है, वहीं भाजपा बैलेट पेपर से हुए चुनावों में कांग्रेस की हार को सामने रखकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में ‘वोट चोरी’ और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।








