कोच्चि। केरल के एर्नाकुलम जिले के रहने वाले एक जवान के करीब 14 साल से लापता होने का मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया है। केरल हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है। लापता युवक सुभाष चंद्र बोस त्रिपुरा स्टेट राइफल्स में राइफलमैन के पद पर तैनात था। वह अप्रैल 2012 में छुट्टी बिताने के बाद ट्रेन से अपनी ड्यूटी पर वापस लौट रहा था, लेकिन रास्ते में अचानक लापता हो गया। उस समय उसकी उम्र महज 27 वर्ष थी। लंबे समय से बेटे की तलाश कर रहे परिवार को अब उम्मीद है कि सीबीआई की जांच से उसके लापता होने की गुत्थी सुलझ सकती है और उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
छुट्टी से ड्यूटी पर लौटते समय ट्रेन से हुआ था लापता
सुभाष चंद्र बोस केरल के एर्नाकुलम जिले के वेंगूर के रहने वाले थे। वह त्रिपुरा स्टेट राइफल्स की तीसरी बटालियन में राइफलमैन के रूप में कार्यरत थे। लापता होने से पहले वह करीब सात वर्षों तक इस सुरक्षा बल में अपनी सेवाएं दे चुके थे। अप्रैल 2012 में छुट्टी पूरी करने के बाद उन्हें वापस त्रिपुरा स्थित अपनी यूनिट में ड्यूटी पर पहुंचना था।
सीबीआई की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, सुभाष ने 3 अप्रैल 2012 की रात करीब 9:20 बजे एर्नाकुलम जंक्शन से एर्नाकुलम-गुवाहाटी एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ी थी। उनके पास आरक्षित टिकट नहीं था, इसलिए वह सामान्य टिकट लेकर ट्रेन में सवार हुए थे। उनके पिता पीके बालन भी उन्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ने आए थे। पिता बेटे को ट्रेन में बैठाने के बाद अलुवा स्टेशन पर उतर गए थे।
ट्रेन में बैठने के बाद सुभाष ने अपने पिता से कहा था कि वह यात्रा के दौरान ट्रेन के टिकट परीक्षक (TTE) की मदद से बैठने के लिए जगह की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगे। इसके बाद वह अपनी यात्रा पर निकल गए, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह परिवार के लिए लंबे इंतजार की शुरुआत बन जाएगी।
मां को फोन कर बताया था आंध्र प्रदेश पहुंचने का हाल
यात्रा के दौरान सुभाष ने 4 अप्रैल 2012 को अपनी मां से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने बताया था कि वह आंध्र प्रदेश पहुंच चुके हैं। अगले दिन यानी 5 अप्रैल को उन्होंने दोबारा परिवार को फोन किया और बताया कि उनके मोबाइल का रिचार्ज बैलेंस कम हो रहा है। उन्होंने परिजनों से कहा था कि कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद वह फिर संपर्क करेंगे।
हालांकि, इसके बाद सुभाष का परिवार से दोबारा संपर्क नहीं हो पाया। परिजन लगातार उनके फोन का इंतजार करते रहे, लेकिन न तो उनका कोई फोन आया और न ही उनके बारे में कोई जानकारी मिली। परिवार की चिंता तब और बढ़ गई, जब 10 अप्रैल 2012 को उन्हें पता चला कि सुभाष त्रिपुरा के धलाई जिले में स्थित अपनी यूनिट में ड्यूटी पर रिपोर्ट नहीं पहुंचे हैं।
पिता ने रेलवे पुलिस में दर्ज कराई थी गुमशुदगी की शिकायत
बेटे के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद पिता पीके बालन ने 13 अप्रैल 2012 को एर्नाकुलम रेलवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके आधार पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच के दौरान रेलवे पुलिस ने सुभाष की यात्रा और उनके संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
जांच में सामने आया कि सुभाष को आखिरी बार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर जीवित देखा गया था। इसके बाद मामले को विशाखापत्तनम की सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को सौंप दिया गया। वहां 15 अक्टूबर 2012 को इस मामले को दोबारा गुमशुदगी के केस के रूप में दर्ज किया गया।
इसके बावजूद लंबे समय तक सुभाष का कोई सुराग नहीं मिल सका। परिवार लगातार अपने स्तर पर भी बेटे की तलाश करता रहा, लेकिन करीब 14 वर्षों तक इस मामले में कोई निर्णायक जानकारी सामने नहीं आई।
पिता की याचिका पर हाईकोर्ट ने CBI जांच के दिए निर्देश
अपने बेटे के लापता होने का रहस्य सुलझाने के लिए पिता पीके बालन ने केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराने की मांग की थी। पिछले महीने हाईकोर्ट ने इस मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया।
अदालत के आदेश के बाद सीबीआई ने एर्नाकुलम रेलवे पुलिस और विशाखापत्तनम सरकारी रेलवे पुलिस, दोनों के मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली है। अधिकारियों के मुताबिक, सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने 28 अक्टूबर को एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दोबारा दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) दाखिल की है।
अब दोनों स्थानों पर दर्ज मामलों को एक साथ ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि सुभाष के लापता होने से जुड़े घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
14 साल बाद परिवार को जांच से नई उम्मीद
सुभाष चंद्र बोस के लापता होने का मामला लंबे समय से उनके परिवार के लिए चिंता और अनिश्चितता का विषय बना हुआ है। ट्रेन में यात्रा के दौरान आखिरी बार परिवार से बातचीत करने के बाद उनका कोई पता नहीं चला। वह अपनी ड्यूटी पर भी नहीं पहुंचे और इसके बाद उनका कोई संपर्क स्थापित नहीं हो सका।
अब केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई द्वारा जांच संभाले जाने के बाद इस मामले में नए सिरे से पड़ताल की जाएगी। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन पर आखिरी बार देखे जाने के बाद सुभाष के साथ क्या हुआ और वह इतने वर्षों तक कहां रहे। परिवार को उम्मीद है कि नई जांच से 2012 से अनसुलझे इस मामले में सच्चाई सामने आएगी।








