नई दिल्ली। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की दो दिवसीय बैठक के समापन सत्र में सदस्य और भागीदार देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़े शब्दों में निंदा की। इस मंच से संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों तथा आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एकजुट, समन्वित और ठोस वैश्विक कार्रवाई करने का जोरदार आह्वान किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन में बनी इस ऐतिहासिक सहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि संयुक्त घोषणा पत्र पर सर्वसम्मति आतंकवाद के खात्मे के लिए ब्रिक्स देशों के दृढ़ और साझा संकल्प को दर्शाती है।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने संयुक्त घोषणा पत्र को सदस्य राष्ट्रों के आपसी सहयोग और साझा दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत का हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि दुनिया की जटिल से जटिल समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष से नहीं बल्कि निरंतर संवाद में है, और युद्ध की जगह शांति तथा प्रतिस्पर्धा से बढ़कर आपसी सहयोग में निहित है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि निर्णय प्रक्रियाओं में ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं को उचित स्थान मिलना चाहिए। भारत का उद्देश्य किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि सभी देशों को साथ लेकर समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ना है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, सभी राष्ट्रों की संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है। इसके अतिरिक्त, घोषणा पत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग और संसदीय सहयोग को मजबूत करने पर भी बल दिया गया है। विश्व में व्याप्त अस्थिरता और आर्थिक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने वर्ष 2027 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संदेश दिया कि नई दिल्ली से विश्वास, निरंतर संवाद और ठोस नतीजों में बदलने वाले सहयोग का स्पष्ट संदेश पूरे विश्व में जाना चाहिए।








