Explore

Search

July 14, 2026 2:06 pm

‘बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के हाथ से निकल चुका है’, मौलाना फजलुर रहमान ने जनरल मुनीर को दी खुली चुनौती

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर सेना और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनाव की चर्चा तेज हो गई है। वरिष्ठ राजनीतिक नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर तीखा हमला बोलते हुए बलूचिस्तान की स्थिति और देश के राजनीतिक हालात को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके बयान ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि बलूचिस्तान में सरकार की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और वहां सुरक्षा तथा प्रशासन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण हालात बिगड़े हैं और सरकार तथा सुरक्षा तंत्र स्थिति को प्रभावी ढंग से संभालने में सफल नहीं रहे हैं।

अपने संबोधन के दौरान मौलाना ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि सेना देश की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाना चाहती है, तो उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि जनता का समर्थन होने का दावा है, तो वर्दी छोड़कर चुनाव लड़ें और जनता का जनादेश हासिल करें।

मौलाना फजलुर रहमान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाएं लगातार दबाव का सामना कर रही हैं और राजनीतिक दलों को स्वतंत्र रूप से काम करने का पूरा अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं का समाधान केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया, संविधान के सम्मान और जनता के जनादेश से ही संभव है।

बलूचिस्तान लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों, अलगाववादी गतिविधियों और विकास संबंधी मुद्दों के कारण चर्चा में रहा है। हाल के वर्षों में वहां कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जिनके चलते केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। हालांकि, क्षेत्र की स्थिति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की राय अलग-अलग है।

मौलाना के इस बयान के बाद पाकिस्तान की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, जनरल असीम मुनीर या पाकिस्तान सेना की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान पाकिस्तान में सेना और राजनीतिक नेतृत्व के संबंधों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकते हैं। आने वाले दिनों में सरकार, विपक्ष और सेना की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर