लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रोजगार के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिला तो इसका असर केवल अर्थव्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और सत्ता पर भी पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि देश का सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार है और लाखों पढ़े-लिखे युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार सृजन की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है और बेरोजगारी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। उनके अनुसार, यदि युवाओं को सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलेगा तो जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त करेगी।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। यदि इस ऊर्जा का सही इस्तेमाल नहीं हुआ तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि रोजगार बढ़ाने के लिए ठोस और दीर्घकालिक नीतियां बनाई जाएं, जिससे उद्योग, कृषि, एमएसएमई और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा हों।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल बड़े निवेश की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि जमीन पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। युवाओं को कौशल विकास, आधुनिक शिक्षा और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे बदलते रोजगार बाजार में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।
राहुल गांधी के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। कांग्रेस ने इसे युवाओं की आवाज बताते हुए सरकार से रोजगार पर विस्तृत जवाब मांगा, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं, निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
रोजगार का मुद्दा लंबे समय से देश की राजनीति के केंद्र में रहा है। आने वाले समय में भी यह विषय राजनीतिक बहस और चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बना रह सकता है, क्योंकि करोड़ों युवाओं की उम्मीदें रोजगार और आर्थिक अवसरों से जुड़ी हुई हैं।








