मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों और स्पीडबोट अड्डों सहित कई रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि कार्रवाई का असर ईरान के 14 प्रांतों तक देखा गया।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में सैन्य ठिकानों, हथियार भंडारण केंद्रों, ड्रोन संचालन से जुड़े परिसरों और नौसैनिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया। विशेष रूप से फारस की खाड़ी में सक्रिय IRGC के स्पीडबोट अड्डों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान और हताहतों की संख्या को लेकर दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
इससे पहले ईरान ने कतर और ओमान में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे थे। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बताया, जबकि अमेरिका ने इन हमलों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा करार देते हुए सैन्य प्रतिक्रिया दी।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना और भविष्य में अमेरिकी हितों तथा सैन्य ठिकानों पर संभावित हमलों को रोकना था। वहीं, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
इस बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है और क्षेत्र में तैनात सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों देशों की ओर से आधिकारिक बयान जारी किए जा रहे हैं और सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहता है या क्षेत्र में व्यापक संघर्ष का रूप लेता है।








