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November 4, 2026 3:21 pm

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अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का मिलेगा विकल्प, सीडीएस जल्द कर सकते हैं बड़ी घोषणा

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती हुए अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प देने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि जल्द ही आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इस फैसले के जरिए सेना में अग्निवीरों के योगदान को महत्व देने के साथ उनकी सेवाओं को आगे भी जारी रखने की जरूरत को रेखांकित किया जाएगा। हालांकि, अतिरिक्त दो साल तक सेवा में बने रहने का फैसला पूरी तरह संबंधित अग्निवीर की इच्छा पर निर्भर करेगा। कोई भी अग्निवीर इस अवधि के लिए सेवा जारी रखने या निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद बाहर जाने का निर्णय स्वयं ले सकेगा।

यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि पूरी होने जा रही है। तीनों सेनाओं की ओर से नवंबर के मध्य से पहले बैच के लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर तक 18,300 से अधिक अग्निवीर अपना चार साल का निर्धारित कार्यकाल पूरा करने के बाद सशस्त्र बलों से बाहर होने वाले थे। ऐसे में दो साल के सेवा विस्तार का प्रस्ताव पहले बैच के हजारों जवानों के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में की गई थी। इस भर्ती व्यवस्था का उद्देश्य सशस्त्र बलों को अपेक्षाकृत युवा बनाए रखना और उनकी युद्धक क्षमता को बनाए रखना है। हालांकि, योजना लागू होने के बाद से ही इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि इसके तहत अधिकारी रैंक से नीचे के सैन्य कर्मियों की नियमित सेवा अवधि कम कर दी गई है और उन्हें पहले की भर्ती व्यवस्था की तुलना में सीमित सेवा लाभ मिलते हैं।

अग्निपथ योजना के प्रावधानों के अनुसार, युवाओं को सशस्त्र बलों में चार साल की अवधि के लिए अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाता है। इस अवधि के पूरा होने के बाद कुल भर्ती अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने का प्रावधान है। चयनित अग्निवीर इसके बाद 15 साल तक नियमित सेवा कर सकते हैं, जबकि शेष 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर सेवा से मुक्त किया जाता है। अब प्रस्तावित दो साल के अतिरिक्त सेवा विकल्प से इस व्यवस्था में एक नया पहलू जुड़ सकता है।

इस वर्ष सेवा से बाहर होने वाले लगभग 18,300 अग्निवीर पहले चरण में सेना, वायुसेना और नौसेना में भर्ती किए गए कुल 24,400 जवानों में से करीब 75 प्रतिशत हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पहले बैच में भारतीय थलसेना में लगभग 19,000, भारतीय वायुसेना में 2,850 और भारतीय नौसेना में करीब 2,550 अग्निवीर शामिल थे। इन जवानों का चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद अब उनके सामने सेवा जारी रखने अथवा सैन्य सेवा से बाहर होने का विकल्प होगा।

तीनों सेनाओं ने विभिन्न जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्रों में अग्निवीरों के प्रदर्शन पर संतोष व्यक्त किया है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य सेवाओं में उनकी भूमिका और योगदान को देखते हुए भविष्य में भर्ती व्यवस्था में बदलाव की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। इससे पहले भी संकेत दिए गए थे कि विशेष तकनीकी और पेशेवर कौशल रखने वाले अग्निवीरों को अधिक संख्या में सैन्य सेवा में बनाए रखने के लिए योजना में संशोधन किया जा सकता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्तमान में भारतीय थलसेना में लगभग 2.70 लाख अग्निवीर, भारतीय वायुसेना में करीब 27 हजार और भारतीय नौसेना में लगभग 21 हजार अग्निवीर विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। तीनों सेनाओं में उनकी तैनाती और कार्यक्षेत्र के अनुभव के आधार पर भविष्य की भर्ती और सेवा संबंधी नीतियों में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। विशेष कौशल वाले जवानों को लंबे समय तक सैन्य सेवाओं में बनाए रखने की संभावना भी इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही है।

अग्निपथ योजना भारतीय सशस्त्र बलों की दशकों पुरानी भर्ती व्यवस्था से एक बड़ा बदलाव है। केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस नई योजना की घोषणा करते हुए पहले से चली आ रही नियमित भर्ती प्रणाली के स्थान पर चार साल के निर्धारित कार्यकाल वाली व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत युवाओं को अग्निवीर के रूप में सेना में शामिल किया जाने लगा। योजना के माध्यम से सैन्य बलों की आयु संरचना को युवा बनाने और भविष्य की सैन्य जरूरतों के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था।

अब पहले बैच के अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के करीब होने और दो साल के अतिरिक्त सेवा विकल्प की तैयारी ने अग्निपथ योजना को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है। यदि इस प्रस्ताव की आधिकारिक घोषणा होती है, तो इससे उन अग्निवीरों को अपनी सैन्य सेवाएं आगे जारी रखने का अवसर मिल सकेगा, जो चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी सशस्त्र बलों में काम करना चाहते हैं। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और अतिरिक्त सेवा की शर्तें आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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