Explore

Search

November 4, 2026 2:39 pm

लेटेस्ट न्यूज़

5 साल बाद BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए PV सिंधु ने किया क्वालीफाई, 2026 में खिताब जीतने पर रहेंगी नजरें

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

नई दिल्ली। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने शानदार प्रदर्शन के दम पर वर्ष 2026 के बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई कर लिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में वह पांच साल के लंबे अंतराल के बाद वापसी करेंगी। इससे पहले सिंधु ने वर्ष 2021 में इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था, जहां उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा था। इस बार प्रतियोगिता का आयोजन चीन के हांगझोऊ में 9 से 13 दिसंबर तक किया जाएगा। सिंधु ने इस सत्र में दो खिताब जीतने और एक अन्य टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचने के दम पर शीर्ष आठ खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए अब तक पांच खिलाड़ियों ने अपनी जगह पक्की कर ली है। इनमें दक्षिण कोरिया की आन से यंग, जापान की अकाने यामागुची, चीन की वांग झी यी, चीन की चेन यू फेई और भारत की पीवी सिंधु शामिल हैं। इस प्रतियोगिता में कुल आठ खिलाड़ियों को प्रवेश दिया जाएगा, जबकि शेष तीन स्थानों के लिए मुकाबला अभी जारी है। इन जगहों को हासिल करने की दौड़ में जापान की टोमोका मियाजाकी और नोजोमी ओकुहारा के अलावा थाईलैंड की रत्चानोक इंतानोन और पोर्नपावी चोचुवोंग, इंडोनेशिया की पुत्री कुसुमा वारदानी तथा डेनमार्क की लाइन क्रिस्टोफर्सन शामिल हैं।

दो खिताब और एक फाइनल ने दिलाया सिंधु को स्थान

पीवी सिंधु ने इस वर्ष अपने प्रदर्शन में निरंतरता दिखाते हुए दो बड़े खिताब अपने नाम किए और एक अन्य प्रतियोगिता के फाइनल में जगह बनाई। इसी प्रदर्शन के आधार पर वह वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने वाली शुरुआती पांच खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। उनके शानदार अभियान की शुरुआत 19 जुलाई को जापान ओपन के फाइनल में हुई, जहां उन्होंने जापान की अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से हराकर खिताब जीता। इस जीत के साथ सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता का परिचय दिया।

इसके बाद अक्टूबर में सिंधु ने फ्रेंच ओपन के फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि, खिताबी मुकाबले में उन्हें दक्षिण कोरिया की आन से यंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। से यंग ने तीन गेम तक चले मुकाबले में सिंधु को 21-16, 11-21, 21-12 से पराजित किया। इस हार के बावजूद सिंधु ने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और अगले ही टूर्नामेंट में दमदार वापसी करते हुए खिताब जीत लिया।

फ्रेंच ओपन के फाइनल में हार के लगभग एक सप्ताह बाद सिंधु ने जर्मनी में आयोजित हाइलो ओपन का खिताब अपने नाम किया। यह प्रतियोगिता 27 अक्टूबर से 1 नवंबर तक सारब्रुकेन में खेली गई। टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता प्राप्त सिंधु ने अपने अनुभव और आक्रामक खेल का प्रभावी प्रदर्शन करते हुए लगातार पांच मुकाबले जीते। खास बात यह रही कि उन्हें पूरे टूर्नामेंट में एक भी गेम गंवाना नहीं पड़ा।

हाइलो ओपन के सेमीफाइनल में सिंधु का सामना भारत की ही अनमोल खरब से हुआ। इस मुकाबले में उन्होंने 21-13, 21-16 से जीत दर्ज कर फाइनल में प्रवेश किया। खिताबी मुकाबले में उनके सामने टूर्नामेंट की आठवीं वरीयता प्राप्त डेनमार्क की खिलाड़ी लाइन होजमार्क क्येर्सफेल्ड्ट थीं। सिंधु ने बेहतरीन तालमेल, तेज स्मैश और सटीक शॉट्स का प्रदर्शन करते हुए उन्हें 21-12, 21-14 से हराया। 39 मिनट तक चले इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने सीधे गेमों में जीत हासिल कर वर्ष 2026 का अपना दूसरा खिताब जीत लिया।

हाइलो ओपन सुपर 500 प्रतियोगिता में मिली इस जीत के लिए सिंधु को 9,200 रैंकिंग अंक प्राप्त हुए। यूरोप में लगातार दो सप्ताह तक चले मुकाबलों में उन्होंने पहले फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचकर अपनी क्षमता दिखाई और फिर हाइलो ओपन जीतकर शानदार अंदाज में अभियान समाप्त किया। लगातार दो बड़े टूर्नामेंटों में इस प्रदर्शन ने उनके आत्मविश्वास और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को भी मजबूती दी।

विश्व रैंकिंग में भी सिंधु ने हासिल की बेहतर स्थिति

ताजा BWF विश्व रैंकिंग के अनुसार, पीवी सिंधु फिलहाल 74,421 अंकों के साथ छठे स्थान पर पहुंच गई हैं। दिसंबर 2022 के बाद विश्व रैंकिंग में यह उनकी सबसे बेहतर स्थिति है। हालांकि, वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए खिलाड़ियों का चयन सामान्य विश्व रैंकिंग के आधार पर नहीं होता, बल्कि इसके लिए अलग अंक प्रणाली लागू की जाती है। इस विशेष क्वालीफिकेशन दौड़ में सिंधु 81,060 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर हैं।

विश्व बैडमिंटन रैंकिंग और वर्ल्ड टूर क्वालीफिकेशन की अंक प्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर है। सामान्य विश्व रैंकिंग में खिलाड़ियों के पिछले 52 सप्ताह के प्रदर्शन को ध्यान में रखा जाता है। इसके विपरीत वर्ल्ड टूर फाइनल्स की क्वालीफिकेशन रैंकिंग में मौजूदा सत्र के दौरान पात्र टूर्नामेंटों में अर्जित अंकों की गणना होती है। इसमें किसी खिलाड़ी के सर्वश्रेष्ठ 14 परिणामों को शामिल किया जाता है, जबकि सुपर 100 श्रेणी के टूर्नामेंटों से अधिकतम तीन परिणाम ही गिने जाते हैं।

वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने के लिए क्वालीफिकेशन सूची में शीर्ष आठ पात्र खिलाड़ियों को प्रवेश मिलता है। हालांकि, प्रतियोगिता में एक देश से अधिकतम दो खिलाड़ी ही हिस्सा ले सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न देशों के खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में प्रतिनिधित्व का अवसर देना है। सिंधु का पांचवें स्थान पर रहना उनके लिए क्वालीफिकेशन की दौड़ में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

वर्ल्ड टूर फाइनल्स में सिंधु का रहा है शानदार इतिहास

पीवी सिंधु के लिए इस प्रतियोगिता में वापसी इसलिए भी खास है, क्योंकि वह वर्ष 2023 से 2025 तक लगातार तीन संस्करणों में हिस्सा नहीं ले सकी थीं। वर्ष 2022 में उन्होंने क्वालीफाई जरूर किया था, लेकिन बाएं टखने में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या के कारण उन्हें टूर्नामेंट से नाम वापस लेना पड़ा था। अब पांच साल बाद वह एक बार फिर इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय चुनौती पेश करने के लिए तैयार हैं।

वर्ल्ड टूर फाइनल्स में सिंधु का पुराना रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने वर्ष 2018 में चीन के ग्वांगझोऊ में आयोजित प्रतियोगिता का खिताब जीतकर इतिहास रचा था। फाइनल में उन्होंने जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर पहली बार यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया था। इससे पहले वर्ष 2017 में आयोजित वर्ल्ड सुपरसीरीज फाइनल्स में भी वह उपविजेता रही थीं। इस तरह लगातार दो वर्षों तक उन्होंने वर्ष के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी।

हालांकि, वर्ष 2019 और 2020 में सिंधु को ग्रुप चरण में ही प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन खिताबी मुकाबले में दक्षिण कोरिया की आन से यंग के हाथों हार गईं। अब वर्ष 2026 में वह एक बार फिर इस प्रतियोगिता में उतरेंगी और अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने के साथ खिताब जीतने की कोशिश करेंगी।

हाइलो ओपन का खिताब जीतने के बाद सिंधु ने कहा था कि इस सफलता से उन्हें काफी प्रोत्साहन और आत्मविश्वास मिला है। लगातार मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उनका मनोबल बढ़ा है। फ्रेंच ओपन के फाइनल में हार के बावजूद अगले ही सप्ताह खिताब जीतना उनके लिए खास उपलब्धि रही। अब यही आत्मविश्वास उन्हें दिसंबर में होने वाले वर्ल्ड टूर फाइनल्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगा।

3.5 मिलियन डॉलर की इनामी राशि के लिए भिड़ेंगी दुनिया की शीर्ष आठ खिलाड़ी

BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स 2026 में कुल 35 लाख डॉलर की पुरस्कार राशि रखी गई है। प्रतियोगिता में क्वालीफाई करने वाली आठ खिलाड़ियों को चार-चार के दो समूहों में बांटा जाएगा। शुरुआती चरण में सभी खिलाड़ी अपने-अपने समूह में राउंड रॉबिन प्रारूप के तहत मुकाबले खेलेंगी। प्रत्येक समूह से शीर्ष दो खिलाड़ी सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी। इसके बाद फाइनल मुकाबले के जरिए प्रतियोगिता के विजेता का फैसला होगा।

पीवी सिंधु के सामने इस बार अपना दूसरा वर्ल्ड टूर फाइनल्स खिताब जीतने का अवसर होगा। उन्होंने पहली बार वर्ष 2018 में यह उपलब्धि हासिल की थी और अब आठ साल बाद वह एक बार फिर उसी सफलता को दोहराने के इरादे से कोर्ट पर उतरेंगी। जापान ओपन और हाइलो ओपन में मिली जीत तथा फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचे उनके सफर ने दिसंबर में होने वाली इस प्रतियोगिता को भारतीय प्रशंसकों के लिए भी खास बना दिया है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर