केरल में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के खिलाफ पुलिस ने साक्ष्य मिटाने के प्रयास का नया मामला दर्ज किया है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने जज के सत्रह वर्षीय नाबालिग बेटे ने अपनी लग्जरी कार से एक स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिसमें सवार व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी। आरोपी जज पर पहले से ही गैर-इरादतन हत्या, लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
पुलिस के अनुसार, मृतक जयाबालकृष्णन के परिवार ने रविवार को एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि हादसे के बाद जज ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से दुर्घटनास्थल पर काफी समय बिताया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जज ने चेरानाल्लूर पुलिस थाने पहुंचकर एक पुलिस अधिकारी पर दबाव डाला और पीड़ित परिवार के सदस्य द्वारा ली गई उनके बेटे की तस्वीर को डिलीट करवा दिया। कोच्चि शहर की पुलिस आयुक्त आर निशांतनी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया कि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया गया है और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
यह सड़क हादसा पच्चीस अक्टूबर को तड़के लगभग ढाई बजे चेरानाल्लूर के पास घटित हुआ था। आरोपी नाबालिग द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज कार ने एक स्ट्रीट फूड विक्रेता के स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। दुर्घटना में शामिल वाहन वर्ष 2012 का मॉडल है, जिसका उपयोग जज आधिकारिक यात्राओं के लिए करते थे। घटना के बाद आरोपी नाबालिग को हिरासत में लिया गया था, जिसे बाद में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा जमानत दे दी गई।
इस बीच, केरल उच्च न्यायालय ने जज को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। जज ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि घटना के समय वे सो रहे थे और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनका बेटा बिना इजाजत के घर से गाड़ी लेकर निकला है। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए निष्पक्ष न्याय की गुहार लगाई है। फिलहाल इस संवेदनशील मामले की विस्तृत जांच एर्नाकुलम जिला अपराध शाखा की विशेष टीम द्वारा की जा रही है और पुलिस ने नाबालिग की जमानत रद्द कराने के लिए अदालत में याचिका भी दायर की है।








