नई दिल्ली। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के दौरान तीन महीने की गर्भवती पत्रकार को धक्का देने के आरोप में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए उन्हें औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि जब वह सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर रही थीं, तब राहुल गांधी ने उन्हें जोरदार धक्का दिया था, जिसके चलते उन्हें गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष इस गर्भवती महिला पत्रकार की याचिका का मौखिक रूप से उल्लेख किया। इसके बाद अदालत की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता पत्रकार का कहना है कि प्रतिवादी ने अचानक उन्हें गेट की तरफ काफी जोर से धक्का दिया, जिससे उनका संतुलन बिगड़ गया और वह जमीन पर गिर गईं। खुद को बचाने के लिए उन्होंने हाथों का सहारा लेने की कोशिश की, लेकिन वह संभल नहीं सकीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह भीड़भाड़ के बीच होने वाली कोई सामान्य या मामूली धक्का-मुक्की नहीं थी, बल्कि उन्हें जानबूझकर धक्का दिया गया था।
याचिका के मुताबिक, घटना के समय पत्रकार लगातार यह गुहार लगाती रहीं कि उन्हें धक्का न दिया जाए, लेकिन आसपास मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए जा रहे “राहुल गांधी जिंदाबाद” के नारों के शोर में उनकी आवाज पूरी तरह दब गई। महिला ने यह भी बताया कि उन्होंने इस घटना के संबंध में डीसीपी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिसके बाद उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।








