अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट और पूर्व अमेरिकी सांसद तुलसी गबार्ड के परमाणु खतरे से जुड़े बयान के बाद भारत ने पाकिस्तान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने साफ कहा है कि ऐसे बयान पाकिस्तान के अतीत और उसके रिकॉर्ड की याद दिलाते हैं, जिसे दुनिया भली-भांति जानती है। भारत के इस बयान के बाद एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने एक इंटरव्यू के दौरान वैश्विक सुरक्षा खतरों पर बात करते हुए पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और क्षेत्रीय तनाव का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि दक्षिण एशिया में अस्थिरता की स्थिति दुनिया के लिए चिंता का कारण बन सकती है। उनके इस बयान के बाद भारत से प्रतिक्रिया मांगी गई, जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सख्त शब्दों में जवाब दिया।
भारत की ओर से कहा गया कि पाकिस्तान का अतीत खुद बताता है कि परमाणु हथियारों को लेकर उसकी नीति हमेशा सवालों के घेरे में रही है। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों के रिकॉर्ड को देखना चाहिए जो बार-बार अस्थिरता पैदा करने के आरोपों में घिरते रहे हैं।
भारतीय अधिकारियों ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि आतंकवाद और परमाणु धमकियों का इतिहास रखने वाले देशों पर दुनिया को भरोसा करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की ओर इशारा माना जा रहा है।
इस मामले के बाद पाकिस्तान की तरफ से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार तनाव की स्थिति बनी है और परमाणु हथियारों का मुद्दा हमेशा संवेदनशील रहा है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र में जहां दोनों देश परमाणु शक्ति रखते हैं, वहां किसी भी बयान को हल्के में नहीं लिया जाता।
फिलहाल इस पूरे मामले पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका की रिपोर्ट, तुलसी गबार्ड के बयान और भारत की प्रतिक्रिया के बाद यह साफ है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक तथा कूटनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।







