देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच छात्र संगठन CJP ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है। संगठन के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक और तेज किया जाएगा।
आशुतोष रांका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि छात्रों का यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के लाखों युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि छात्रों का धैर्य लगातार टूट रहा है और अब वे जवाबदेही चाहते हैं।
‘मांगें नहीं मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन’
रांका ने कहा कि संगठन ने सरकार के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं। उनका कहना है कि यदि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित अन्य मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन, धरना और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
परीक्षा प्रणाली पर उठ रहे सवाल
हाल के दिनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। कई छात्र संगठनों का आरोप है कि बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और अनियमितताओं से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर छात्र लगातार जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने भी उठाए हैं सख्त कदम
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाया जाएगा। हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।
आगे क्या?
फिलहाल छात्रों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। CJP ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से अब तक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच होने वाली बातचीत तथा आंदोलन की दिशा पर सभी की नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंचते हैं या आंदोलन और अधिक तेज होता है।








