सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को चांदी की कीमत में ₹3,155 प्रति किलोग्राम की कमी आई, जिसके बाद इसका भाव घटकर ₹2.17 लाख प्रति किलो पर पहुंच गया। वहीं, सोने की कीमत में भी ₹1,079 प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई। लगातार दूसरे दिन आई इस नरमी ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को राहत दी है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और निवेशकों की बदलती रणनीति का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी की मांग में नरमी आने तथा मुनाफावसूली के चलते दोनों धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई।
विशेष रूप से चांदी की कीमतों में पिछले एक महीने के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बाजार आंकड़ों के अनुसार, चांदी का भाव करीब ₹25 हजार प्रति किलो तक नीचे आ चुका है। इससे उद्योगों के साथ-साथ ज्वेलरी कारोबारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का व्यापक उपयोग होता है, इसलिए इसकी कीमत में कमी का असर इन क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
वहीं, सोने की कीमत में आई गिरावट को भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। त्योहारों और शादी के सीजन से पहले यदि कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो आभूषणों की मांग बढ़ सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, ब्याज दरों और डॉलर इंडेक्स जैसे कई कारकों से प्रभावित होती हैं, इसलिए इनमें उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जो लोग लंबे समय के निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट एक अवसर साबित हो सकती है। हालांकि निवेश का निर्णय लेने से पहले बाजार की चाल, जोखिम और विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में गिरावट के बाद ग्राहकों की पूछताछ बढ़ी है और आने वाले दिनों में खरीदारी में तेजी देखने को मिल सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना रहता है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, सोना और चांदी दोनों ही हाल के उच्च स्तरों से नीचे कारोबार कर रहे हैं। निवेशकों और खरीदारों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों और आने वाले कारोबारी सत्रों पर बनी हुई है, जो आगे इन कीमती धातुओं की कीमतों की दिशा तय करेंगे।








