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August 23, 2026 6:16 pm

नागपुर में बना वर्ल्ड रिकॉर्ड! 4 हजार युवाओं ने एक साथ बजाए ढोल-ताशे, 585 ध्वजवाहकों के साथ एशिया बुक में दर्ज हुआ नाम

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नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में रविवार को ढोल-ताशा वादन का भव्य आयोजन हुआ, जहां हजारों युवाओं ने एक साथ पारंपरिक वाद्य बजाकर नया रिकॉर्ड बनाने का दावा किया। कार्यक्रम में करीब 4 हजार युवाओं ने सामूहिक रूप से ढोल-ताशा वादन किया, जबकि 585 ध्वजवाहकों ने एक साथ हिस्सा लेकर आयोजन को और खास बना दिया। इस आयोजन के बाद इसका नाम एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

ढोल-ताशों की गूंज से गूंज उठा नागपुर

कार्यक्रम के दौरान एक साथ हजारों ढोल-ताशों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ युवाओं ने अनुशासित तरीके से सामूहिक प्रस्तुति दी। बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी ने आयोजन को आकर्षण का केंद्र बना दिया।

आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना था। बड़ी संख्या में युवाओं ने इसमें उत्साह के साथ भाग लिया।

4 हजार युवाओं ने एक साथ किया वादन

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत करीब 4,000 युवाओं की सामूहिक भागीदारी रही। अलग-अलग समूहों से आए ढोल-ताशा वादकों ने निर्धारित समय पर एक साथ वादन किया। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के लिए यह नजारा बेहद खास रहा।

आयोजकों की ओर से रिकॉर्ड के लिए जरूरी मानकों और प्रतिभागियों की संख्या से संबंधित प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी दी गई। इसके बाद आयोजन को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किए जाने की घोषणा की गई।

585 ध्वजवाहकों ने बढ़ाई आयोजन की भव्यता

ढोल-ताशा वादन के साथ 585 ध्वजवाहकों की मौजूदगी भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। हाथों में ध्वज लिए बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में अनुशासन और एकरूपता के साथ हिस्सा लिया।

ढोल-ताशों की लय और ध्वजों की कतार ने पूरे कार्यक्रम को भव्य रूप दिया। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने इस प्रस्तुति को मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

एशिया बुक में दर्ज हुआ नाम

कार्यक्रम के आयोजकों के मुताबिक, सामूहिक ढोल-ताशा वादन के इस आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद आयोजकों और प्रतिभागियों में उत्साह देखने को मिला।

आयोजकों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की लोक और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए भी गौरव की बात है। उनका उद्देश्य पारंपरिक वाद्य संस्कृति को आधुनिक दौर में भी लोकप्रिय बनाए रखना है।

युवाओं ने दिखाई सांस्कृतिक एकजुटता

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पारंपरिक कला और संस्कृति को नई पीढ़ी भी पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ा सकती है। ढोल-ताशा महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रमुख पारंपरिक वाद्यों में शामिल हैं और गणेशोत्सव समेत कई बड़े सार्वजनिक आयोजनों में इनका विशेष महत्व रहता है।

आयोजकों ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर सामूहिक प्रस्तुति आयोजित करने के लिए प्रतिभागियों ने लंबे समय तक अभ्यास और तैयारी की। वादन में तालमेल बनाए रखना और हजारों लोगों को एक साथ निर्धारित लय में प्रस्तुति देने के लिए विशेष प्रशिक्षण और समन्वय की जरूरत थी।

नागपुर के लिए यादगार बना आयोजन

इस आयोजन ने नागपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्यता का नया उदाहरण पेश किया। कार्यक्रम में शामिल युवाओं के लिए भी यह अनुभव खास रहा। रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने की घोषणा के बाद प्रतिभागियों ने उत्साह जताया और इसे अपनी मेहनत की उपलब्धि बताया।

आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए आयोजकों और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी व्यवस्थाएं की गईं।

परंपरा और रिकॉर्ड का संगम

नागपुर में हुआ यह आयोजन परंपरा और आधुनिक रिकॉर्ड बनाने की कोशिश का संगम रहा। एक तरफ हजारों युवाओं ने महाराष्ट्र की पारंपरिक ढोल-ताशा वादन शैली का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर सामूहिक प्रस्तुति को रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कराने की कोशिश की गई।

4 हजार युवाओं का सामूहिक ढोल-ताशा वादन और 585 ध्वजवाहकों की भागीदारी ने नागपुर के इस आयोजन को खास बना दिया। एशिया बुक में नाम दर्ज होने के दावे के साथ यह आयोजन शहर और इसमें शामिल युवाओं के लिए एक यादगार उपलब्धि बन गया।

Rashmi Repoter
Author: Rashmi Repoter

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