जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में स्क्रब टाइफस के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। अस्पताल से सामने आई जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में स्क्रब टाइफस के 339 मामले सामने आए हैं, जबकि इस दौरान 15 मरीजों की मौत होने की बात कही जा रही है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सितंबर महीने में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी और मामलों में करीब दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई।
स्क्रब टाइफस एक संक्रमण है, जो संक्रमित माइट्स के काटने से फैलता है। बारिश और नमी के मौसम में इसके मामले बढ़ सकते हैं। राजस्थान में मानसून के बाद कई इलाकों में इसके मरीज सामने आते हैं, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों में निगरानी बढ़ाना जरूरी हो जाता है।
सितंबर में अचानक बढ़े मरीज
SMS अस्पताल से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में स्क्रब टाइफस के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई। इससे पहले जहां मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, वहीं सितंबर में इसमें तेज उछाल आया।
मौसम में बदलाव, बारिश के बाद बढ़ी नमी और ग्रामीण या घास-पत्तियों वाले इलाकों में लोगों की आवाजाही को संक्रमण के संभावित जोखिम से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि किसी खास मरीज में संक्रमण का कारण डॉक्टर की जांच और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर ही तय किया जाता है।
क्या है स्क्रब टाइफस?
स्क्रब टाइफस एक बैक्टीरियल संक्रमण है। यह मुख्य रूप से संक्रमित चिगर माइट के काटने से इंसानों में पहुंचता है। संक्रमण के बाद व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, कमजोरी और कई मामलों में अन्य लक्षण हो सकते हैं।
कई बार इसके शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि लगातार बुखार रहने पर इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
खासकर ऐसे लोग जो खेतों, झाड़ियों, घास या ग्रामीण इलाकों में ज्यादा समय बिताते हैं, उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में ऐसे स्थानों पर जाते समय शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों में लगातार बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
लगातार बुखार को नजरअंदाज न करें
स्क्रब टाइफस के लक्षण कई अन्य संक्रमणों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का इलाज करना उचित नहीं है। अगर बुखार लगातार बना रहता है, कमजोरी बढ़ती है या हालत बिगड़ती महसूस होती है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
समय पर जांच और चिकित्सकीय उपचार से संक्रमण का प्रबंधन किया जा सकता है। किसी भी तरह की दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।
बारिश के बाद बढ़ सकती है सतर्कता की जरूरत
स्क्रब टाइफस के मामलों में मौसमी बदलाव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। बारिश के बाद नमी बढ़ने से ऐसे वातावरण बन सकते हैं जहां माइट्स की मौजूदगी का जोखिम बढ़ता है। यही वजह है कि मानसून और उसके बाद के महीनों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जयपुर के SMS अस्पताल में बताए गए 339 मामलों और 15 मौतों के आंकड़ों के बाद इस संक्रमण को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। हालांकि मौतों और मरीजों के आंकड़ों की अंतिम स्थिति आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल के विस्तृत रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल विशेषज्ञों की सलाह यही है कि लगातार बुखार या अन्य असामान्य लक्षणों को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से जांच कराएं। खासकर बारिश के बाद ग्रामीण और झाड़ीदार इलाकों में रहने या जाने वाले लोगों को संक्रमण से बचाव के सामान्य उपायों पर ध्यान देना चाहिए।








