सोशल मीडिया पर इन दिनों अभिनेत्री Kriti Sanon के नाम से एक कथित डीपफेक (Deepfake) वीडियो तेजी से वायरल होने का दावा किया जा रहा है। इस वीडियो को लेकर अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिसके चलते फैंस के बीच भ्रम और चिंता का माहौल बन गया है। हालांकि, ऐसे मामलों में किसी भी वायरल वीडियो को बिना आधिकारिक पुष्टि के वास्तविक मान लेना गलत हो सकता है।
डीपफेक तकनीक आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों में से एक मानी जाती है। इसकी मदद से किसी भी व्यक्ति के चेहरे और आवाज को डिजिटल रूप से इस तरह बदला जा सकता है कि पहली नजर में वीडियो बिल्कुल असली दिखाई दे। यही कारण है कि कई बार मशहूर हस्तियों के नाम पर फर्जी वीडियो और तस्वीरें वायरल हो जाती हैं, जिससे लोगों के बीच भ्रम फैलता है।
कृति सैनन के नाम पर वायरल हो रहे इस कथित वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए जा रहे हैं। हालांकि, इस बात की कोई विश्वसनीय और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है कि वायरल किया जा रहा कंटेंट वास्तव में उनका है। ऐसे मामलों में यह संभावना रहती है कि वीडियो AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया हो या किसी अन्य व्यक्ति के वीडियो को गलत तरीके से अभिनेत्री के नाम से साझा किया जा रहा हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक तकनीक का गलत इस्तेमाल न केवल किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि यह साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी का भी बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। सेलिब्रिटीज के अलावा आम लोग भी इस तकनीक का शिकार हो सकते हैं। यही वजह है कि डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन जागरूकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो या फोटो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल वायरल होने भर से कोई भी सामग्री सही साबित नहीं हो जाती। कई बार पुराने वीडियो, एडिट किए गए क्लिप या AI से तैयार किए गए फर्जी कंटेंट को नए दावों के साथ साझा किया जाता है, जिससे गलत जानकारी तेजी से फैलती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि यदि किसी सेलिब्रिटी या आम व्यक्ति के नाम पर संदिग्ध वीडियो या तस्वीरें सामने आएं, तो उन्हें बिना पुष्टि के शेयर करने से बचें। इससे न केवल गलत सूचना फैलती है, बल्कि संबंधित व्यक्ति की निजता और प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी AI-जनित फर्जी कंटेंट और डीपफेक के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठाने की दिशा में काम कर रहे हैं। नई तकनीकों की मदद से ऐसे वीडियो की पहचान करने और उन्हें हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उपयोगकर्ताओं की सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है।
फिलहाल, कृति सैनन के नाम पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो को लेकर किसी आधिकारिक स्रोत से इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में दर्शकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सामग्री को आगे साझा करने से बचें।








