तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे सियासी विवाद ने अब संसद में भी बड़ा मोड़ ले लिया है। लोकसभा सचिवालय ने पार्टी से अलग हुए 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं के सिलसिले में की गई है। नोटिस 25 अगस्त को जारी किए गए और इन्हें दल-बदल कानून के तहत चल रही कार्यवाही का हिस्सा बताया गया है।
सायोनी घोष और यूसुफ पठान भी शामिल
नोटिस पाने वाले सांसदों में अभिनेत्री से नेता बनीं सायोनी घोष और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान समेत TMC के कई चर्चित चेहरे शामिल हैं। इन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने TMC से अलग होकर एक अन्य राजनीतिक समूह के साथ जुड़ने की पहल की। इससे पार्टी के भीतर चल रहा विवाद अब औपचारिक संसदीय कार्यवाही तक पहुंच गया है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला उस समय शुरू हुआ जब TMC के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जुड़ने और संसद में अलग समूह के तौर पर मान्यता दिए जाने की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक, इन सांसदों को संसद में NCPI समूह के रूप में माना गया और उन्होंने NDA की संसदीय गतिविधियों में भी हिस्सा लिया।
TMC का तर्क है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लोकसभा पहुंचे थे और बाद में दूसरे राजनीतिक गठन के साथ जाने का फैसला दलबदल कानून के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है। दूसरी तरफ बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम वैध विलय के दायरे में आता है। यही विवाद अब स्पीकर के सामने अयोग्यता की कार्यवाही का मुख्य मुद्दा है।
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
इस पूरे घटनाक्रम के बीच TMC महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका में स्पीकर के सामने लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए 20 सांसदों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि स्पीकर की ओर से 20 सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद अदालत ने भी संबंधित सांसदों से जवाब मांगा।
सात दिन में देना होगा जवाब
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में बागी सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इसके बाद उनके जवाब और मामले से जुड़े दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सांसदों की सदस्यता निश्चित रूप से जाएगी या नहीं। अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
क्या रद्द हो सकती है सांसदों की सदस्यता?
इस मामले का केंद्र संविधान की दसवीं अनुसूची, यानी दल-बदल विरोधी कानून है। TMC की ओर से दायर याचिकाओं में दावा किया गया है कि सांसदों ने पार्टी से अपना संबंध छोड़कर दूसरे राजनीतिक गठन के साथ जाने का फैसला किया है। वहीं बागी सांसद अपने कदम को वैध विलय के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इसलिए आगे की कार्यवाही में यह महत्वपूर्ण होगा कि सांसदों के अलग होने की परिस्थितियों और उनके राजनीतिक कदम को कानून की संबंधित धाराओं के तहत कैसे देखा जाता है। फिलहाल नोटिस जारी होना अपने आप में सदस्यता समाप्त होने का फैसला नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
अब सभी 20 सांसदों को निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब देना होगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता याचिकाओं पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
TMC के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में सांसदों के अलग रुख अपनाने से पार्टी के संसदीय दल की स्थिति प्रभावित हुई है। वहीं बागी सांसदों के लिए भी आने वाले दिन अहम हैं, क्योंकि उनकी सदस्यता और संसद में उनकी राजनीतिक स्थिति पर इस प्रक्रिया का असर पड़ सकता है।
फिलहाल सायोनी घोष, यूसुफ पठान समेत 20 बागी TMC सांसदों को नोटिस जारी होने के बाद सियासी और कानूनी दोनों मोर्चों पर हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सात दिन के भीतर सांसद क्या जवाब देते हैं और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।








