प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय सुपर-स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की कमी से जूझ रही है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद खाली पड़े हैं, जिसके चलते मरीजों को समय पर इलाज और विशेषज्ञ परामर्श मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने रिटायर्ड डॉक्टरों को दोबारा सेवाओं में लेने का फैसला किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और अन्य सुपर-स्पेशियलिटी विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। कई मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में स्वीकृत पदों के मुकाबले पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि सरकार ने ऐसे अनुभवी चिकित्सकों को फिर से नियुक्त करने की योजना बनाई है जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन अब भी अपनी सेवाएं देने के इच्छुक हैं। इस व्यवस्था के तहत उन्हें विशेष अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया जाएगा, ताकि अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि अधिकांश सुपर-स्पेशियलिस्ट डॉक्टर राजधानी जयपुर के बड़े संस्थानों में ही कार्य करना चाहते हैं। कई चिकित्सक छोटे शहरों और नए मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरण या नियुक्ति लेने के लिए तैयार नहीं होते। यही वजह है कि प्रदेश के कई जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बेहद सीमित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रिटायर्ड डॉक्टरों की नियुक्ति से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए मेडिकल शिक्षा में सीटों की संख्या बढ़ाने, विशेषज्ञ डॉक्टरों को आकर्षित करने के लिए बेहतर सुविधाएं देने और दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लागू करने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ सकता है, जिससे आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ेंगी।
फिलहाल सरकार की कोशिश है कि रिटायर्ड विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुभव का लाभ लेकर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, लंबे समय के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार और स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।








