Explore

Search

November 3, 2026 10:25 pm

लेटेस्ट न्यूज़

दूसरे राज्यों की निजी कारों से वैध अधिसूचना के बिना टैक्स वसूली गलत, हाईकोर्ट ने दिए जब्त वाहन छोड़ने और वसूली गई रकम लौटाने के आदेश

WhatsApp
Facebook
Twitter
Email

जयपुर। राजस्थान में दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी कारों और जीपों को 30 दिन से अधिक समय तक चलाने के आधार पर परिवहन विभाग द्वारा टैक्स वसूलने और वाहन जब्त करने की कार्रवाई को राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परिवहन विभाग वैध कानूनी प्रावधान और संबंधित अधिसूचना के बिना दूसरे राज्यों में पंजीकृत गैर-परिवहन वाहनों से राजस्थान में एकमुश्त टैक्स की वसूली नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ताओं से वसूली गई टैक्स की राशि 30 दिनों के भीतर लौटाने और जब्त किए गए वाहनों को तत्काल मुक्त करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने सोमवार को हार्पी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति से कर की वसूली के लिए कानून में स्पष्ट और वैध प्रावधान होना अनिवार्य है। केवल प्रशासनिक आदेशों या अधिसूचना की व्याख्या के आधार पर किसी वाहन मालिक से टैक्स की मांग नहीं की जा सकती। अदालत के इस फैसले से उन वाहन मालिकों को राहत मिली है, जिनकी निजी गाड़ियां दूसरे राज्यों में पंजीकृत हैं और जिन्हें राजस्थान में 30 दिन से अधिक समय तक वाहन रखने या चलाने के आधार पर परिवहन विभाग की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था।

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, इस मामले में दूसरे राज्यों में पंजीकृत कई निजी कारों के मालिकों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कर परिवहन विभाग की कार्रवाई को चुनौती दी थी। इन वाहन मालिकों की गाड़ियां राजस्थान के बाहर के राज्यों में पंजीकृत थीं। इनमें हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के वाहन शामिल थे। इन सभी वाहनों का संबंधित राज्यों में विधिवत पंजीकरण कराया गया था और वहां निर्धारित लाइफटाइम टैक्स भी पहले ही जमा किया जा चुका था।

इसके बावजूद जब ये निजी वाहन राजस्थान में चल रहे थे, तब परिवहन विभाग की उड़नदस्ते की टीमों ने जांच के दौरान कई गाड़ियों को रोक लिया। विभाग की ओर से वाहन मालिकों को बताया गया कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत होने के बावजूद इन वाहनों का राजस्थान में 30 दिनों से अधिक समय तक उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में वाहन मालिकों को राजस्थान में निर्धारित रोड टैक्स जमा करना होगा। टैक्स जमा नहीं करने पर विभाग ने वाहनों को जब्त करने और उनसे कर वसूलने की कार्रवाई की थी।

परिवहन विभाग का तर्क था कि राजस्थान में लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा रहे दूसरे राज्यों के निजी वाहनों पर राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत टैक्स देय हो जाता है। विभाग ने इसी आधार पर वाहन मालिकों से टैक्स की मांग की और कई मामलों में गाड़ियों को जब्त भी कर लिया। इस कार्रवाई से परेशान वाहन मालिकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और विभाग की ओर से की जा रही वसूली को कानून के विपरीत बताया।

याचिकाकर्ताओं ने कहा- कानून के बिना टैक्स वसूलना संविधान के खिलाफ

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उनके वाहनों का पंजीकरण संबंधित राज्यों में पहले से वैध रूप से कराया गया है और उन पर लागू लाइफटाइम टैक्स भी जमा किया जा चुका है। ऐसे में राजस्थान में इन वाहनों के इस्तेमाल के आधार पर दोबारा एकमुश्त टैक्स की मांग करने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने परिवहन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि किसी वाहन का दूसरे राज्य में पंजीकृत होना और वहां टैक्स जमा होना एक स्थापित तथ्य है। इसके बावजूद राजस्थान में अतिरिक्त टैक्स वसूलने के लिए संबंधित कानून के तहत स्पष्ट प्रावधान होना जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 265 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति से कर की वसूली तभी की जा सकती है, जब इसके लिए कानून में वैध व्यवस्था मौजूद हो। संविधान का अनुच्छेद 265 स्पष्ट करता है कि कानून के अधिकार के बिना किसी से भी कर नहीं वसूला जा सकता। ऐसे में परिवहन विभाग केवल अपने प्रशासनिक आदेशों या किसी अधिसूचना की व्याख्या के आधार पर वाहन मालिकों से टैक्स नहीं मांग सकता। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब तक संबंधित श्रेणी के वाहनों के लिए कानून के अनुरूप स्पष्ट अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक इस तरह की टैक्स वसूली और वाहन जब्ती की कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।

सरकार ने किया कार्रवाई का बचाव

वहीं, राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में परिवहन विभाग की कार्रवाई का बचाव किया गया। सरकार ने दलील दी कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी वाहनों का राजस्थान में 30 दिनों से अधिक समय तक इस्तेमाल किया जा रहा था। नियम 28 के अनुसार, यदि कोई वाहन राजस्थान में 30 दिन से अधिक समय तक रहता है तो उस पर राज्य के नियमों के मुताबिक टैक्स देय हो जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि राजस्थान सरकार ने 10 जुलाई 2024 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें गैर-परिवहन वाहनों पर लागू एकमुश्त टैक्स की दरें निर्धारित की गई थीं।

सरकार का कहना था कि इस अधिसूचना में दूसरे राज्यों में पहले से पंजीकृत वाहनों का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए राजस्थान में 30 दिनों से अधिक समय तक चलने वाले ऐसे वाहनों से टैक्स मांगने और नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें जब्त करने की कार्रवाई कानून के दायरे में की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में यह पक्ष रखा कि परिवहन विभाग ने निर्धारित नियमों और अधिसूचना के आधार पर ही कार्रवाई की है तथा इसमें किसी तरह की अवैधानिकता नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा- कार्रवाई के लिए अलग से वैध अधिसूचना जरूरी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के कानूनी प्रावधानों और संबंधित अधिसूचनाओं का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि 10 जुलाई 2024 को जारी अधिसूचना में यात्री वाहनों और माल वाहनों के लिए टैक्स की दरें निर्धारित की गई थीं, लेकिन गैर-परिवहन श्रेणी के निजी कारों के संबंध में संबंधित कानूनी धारा के तहत आवश्यक अलग अधिसूचना उपलब्ध नहीं थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी अधिसूचना में पहले से पंजीकृत वाहनों का उल्लेख कर देना मात्र पर्याप्त नहीं है। ऐसा उल्लेख संबंधित कानून की आवश्यक शर्तों और कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं बन सकता। किसी विशेष श्रेणी के वाहन से टैक्स वसूलने के लिए संबंधित प्रावधानों के तहत आवश्यक अधिसूचना जारी होना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना के आधार पर दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी कारों से एकमुश्त टैक्स की वसूली नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने इसी कानूनी आधार पर परिवहन विभाग की ओर से की गई टैक्स वसूली और वाहन जब्ती की कार्रवाई को अवैध माना। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं से वसूली गई टैक्स की रकम 30 दिनों के भीतर वापस की जाए। साथ ही, जिन वाहनों को इस कार्रवाई के तहत जब्त किया गया है, उन्हें तत्काल छोड़ने के आदेश भी दिए गए।

फैसले से दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी वाहन मालिकों को राहत

राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले को दूसरे राज्यों में पंजीकृत निजी कारों और जीपों के मालिकों के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे वाहन मालिक, जिन्हें राजस्थान में 30 दिनों से अधिक समय तक वाहन चलाने या रखने के आधार पर टैक्स जमा करने के लिए कहा गया था अथवा जिनकी गाड़ियां जब्त कर ली गई थीं, उन्हें इस फैसले से राहत मिली है। अदालत ने अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि कर वसूली के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है और किसी भी विभाग को बिना वैध कानूनी आधार के नागरिकों से टैक्स वसूलने का अधिकार नहीं है।

इस फैसले के जरिए हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि प्रशासनिक कार्रवाई करते समय संवैधानिक प्रावधानों और कानून की सीमाओं का पालन करना आवश्यक है। केवल किसी अधिसूचना में वाहनों का उल्लेख होने से टैक्स लगाने का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत जरूरी अधिसूचना जारी होना भी अनिवार्य है। अदालत के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को वसूली गई राशि लौटाने और जब्त वाहनों को छोड़ने की कार्रवाई निर्धारित निर्देशों के तहत करनी होगी।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

ताजा खबरों के लिए एक क्लिक पर ज्वाइन करे व्हाट्सएप ग्रुप

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर