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November 3, 2026 9:57 pm

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने नमित मल्होत्रा की फिल्म ‘रामायण’ को दिया अंतरिम कॉपीराइट संरक्षण, अवैध लिंक और वेबसाइटों को तुरंत हटाने के निर्देश

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मुंबई। नमित मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड’ को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने फिल्म को कॉपीराइट उल्लंघन से बचाने के लिए अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए अज्ञात व्यक्तियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को फिल्म की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करने, उसे इंटरनेट पर अपलोड करने, होस्ट करने या प्रसारित करने से रोक दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद फिल्म से जुड़ी किसी भी अवैध सामग्री, वीडियो और मिरर वेबसाइटों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी। फिल्म 5 नवंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। रिलीज से ठीक पहले मिले इस न्यायिक संरक्षण को फिल्म के निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को यह अंतरिम आदेश गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कंपनी ने कॉपीराइट उल्लंघन की आशंका जताते हुए फिल्म की पटकथा, किरदारों, शूट किए गए दृश्यों, गीतों, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग सहित उससे जुड़ी सभी रचनात्मक सामग्री को कानूनी संरक्षण देने की मांग की थी। याचिका के अनुसार, फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान सख्त गोपनीयता संबंधी शर्तें लागू होने के बावजूद कुछ लोगों ने चोरी-छिपे ट्रेलर की रिकॉर्डिंग कर ली और उसे इंटरनेट के विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित कर दिया। इसके बाद निर्माताओं को आशंका हुई कि फिल्म के अन्य दृश्य और सामग्री भी अवैध रूप से रिकॉर्ड करके ऑनलाइन साझा किए जा सकते हैं।

विशेष स्क्रीनिंग में रिकॉर्ड किए गए थे फिल्म के दो ट्रेलर

अदालत को बताया गया कि ‘रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड’ की विशेष स्क्रीनिंग केवल आमंत्रित लोगों के लिए आयोजित की गई थी। इसमें शामिल होने वाले लोगों को फिल्म की सामग्री को गोपनीय रखने और बिना अनुमति किसी भी तरह की रिकॉर्डिंग या प्रसारण नहीं करने की शर्तों का पालन करना था। इसके बावजूद फिल्म के दो ट्रेलर चोरी-छिपे रिकॉर्ड कर लिए गए और बाद में उन्हें डिजिटल नेटवर्क तथा इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया।

निर्माता कंपनी ने अदालत के सामने आशंका जताई कि यदि समय रहते इस तरह की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो फिल्म के रिलीज होने से पहले ही उसके महत्वपूर्ण दृश्य, वीडियो और अन्य कॉपीराइट सामग्री बड़े पैमाने पर इंटरनेट पर उपलब्ध हो सकती है। इससे फिल्म के व्यावसायिक हितों को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ निर्माताओं के बौद्धिक संपदा अधिकारों का भी उल्लंघन होगा।

इस मामले में अज्ञात व्यक्तियों के अलावा करीब 34 कंपनियों और संस्थाओं को भी प्रतिवादी बनाया गया है। इनमें मुख्य रूप से इंटरनेट सेवा प्रदाता और डिजिटल मध्यस्थता से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। याचिका के जरिए मांग की गई थी कि अदालत ऐसे सभी लोगों और प्लेटफॉर्म को फिल्म की सामग्री का अनधिकृत इस्तेमाल करने से रोके तथा इंटरनेट पर मौजूद अवैध लिंक और वीडियो को हटाने के लिए प्रभावी निर्देश जारी करे।

फिल्म के पहले भाग पर 2,000 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी

सुनवाई के दौरान अदालत को फिल्म के विशाल बजट के बारे में भी जानकारी दी गई। निर्माता पक्ष की ओर से बताया गया कि फिल्म के पहले भाग को बनाने में लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि दोनों भागों को मिलाकर इस पूरी फिल्म परियोजना का कुल बजट करीब 4,000 करोड़ रुपये बताया गया है। इतनी बड़ी लागत वाली फिल्म की सामग्री का अवैध प्रसारण निर्माताओं के लिए गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

निर्माताओं का कहना था कि फिल्म की पटकथा, पात्रों की संरचना, दृश्य, संगीत और अन्य रचनात्मक सामग्री पर उनके कॉपीराइट अधिकार हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या डिजिटल प्लेटफॉर्म को बिना अनुमति इनका इस्तेमाल करने, रिकॉर्डिंग करने या सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने की छूट नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर अदालत से तत्काल अंतरिम राहत देने का अनुरोध किया गया था।

गूगल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने आदेश पर नहीं जताई आपत्ति

सुनवाई के दौरान गूगल एलएलसी और अन्य वैश्विक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें अंतरिम राहत देने संबंधी आदेश पारित किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि संबंधित प्लेटफॉर्म को अवैध सामग्री के लिंक की सूचना मिलने पर आवश्यक कार्रवाई शीघ्र की जाएगी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति माधव जामदार की पीठ ने की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की यह आशंका वास्तविक और ठोस आधार पर है कि फिल्म या उसके कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड करके विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा सकता है, वहां से स्ट्रीम किया जा सकता है अथवा अन्य माध्यमों से आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

अदालत ने माना कि ऐसी आशंका को देखते हुए फिल्म के कॉपीराइट और उससे जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिए तत्काल अंतरिम राहत देना जरूरी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फिल्म की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और डिजिटल माध्यमों से उसके प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।

अवैध लिंक और मिरर वेबसाइटों को तुरंत ब्लॉक करने के निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश में डायनेमिक इंजंक्शन यानी गतिशील निषेधाज्ञा भी शामिल है। इसके तहत फिल्म की सामग्री को अवैध रूप से प्रसारित करने वाले अज्ञात व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। अदालत ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि फिल्म से संबंधित किसी भी आपत्तिजनक या कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाले लिंक की लिखित सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करें।

अदालत ने गॉडपावर मीडिया को निर्देश दिया है कि वह फिल्म की अवैध सामग्री उपलब्ध कराने वाले संबंधित यूआरएल यानी इंटरनेट लिंक की जानकारी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म को उपलब्ध कराए। इसके बाद संबंधित कंपनियों को उन लिंक को तुरंत ब्लॉक करने, उनकी पहुंच निष्क्रिय करने या उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

इस आदेश में मिरर वेबसाइटों को भी शामिल किया गया है। मिरर वेबसाइट ऐसी वेबसाइटें होती हैं, जिन पर किसी दूसरी वेबसाइट की सामग्री की नकल करके उसे अलग इंटरनेट पते पर उपलब्ध कराया जाता है। कई बार मूल लिंक हटाए जाने के बाद भी ऐसी वैकल्पिक वेबसाइटों के माध्यम से अवैध सामग्री प्रसारित होती रहती है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिल्म की सामग्री उपलब्ध कराने वाले ऐसे वैकल्पिक लिंक और वेबसाइटों पर भी कार्रवाई की जा सकेगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित यूआरएल की जानकारी मिलने पर इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और डिजिटल मध्यस्थों को बिना अनावश्यक देरी के कार्रवाई करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फिल्म के अवैध वीडियो और अन्य कॉपीराइट सामग्री को इंटरनेट पर फैलने से रोका जा सके।

16 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है। तब तक अदालत की ओर से दिया गया अंतरिम संरक्षण प्रभावी रहेगा। यानी फिल्म के निर्माताओं को फिलहाल कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ कानूनी सुरक्षा मिल गई है और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म को अवैध सामग्री के संबंध में सूचना मिलने पर तत्काल कदम उठाने होंगे।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी है दो भागों वाली ‘रामायण’

‘रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड’ का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है। यह फिल्म महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित प्राचीन महाकाव्य रामायण पर आधारित है। नमित मल्होत्रा ने डीएनईजी और प्राइम फोकस स्टूडियोज के बैनर तले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण किया है। अभिनेता यश भी इस फिल्म के सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं।

दो भागों में तैयार की जा रही इस सिनेमाई गाथा में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। रवि दुबे लक्ष्मण, यश रावण और सनी देओल भगवान हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे।

फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्साह बना हुआ है। बड़े बजट, भव्य निर्माण और प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी के कारण इसे भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में रिलीज से पहले फिल्म के ट्रेलर की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग और इंटरनेट पर प्रसारण की घटना ने निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी थी। अब बॉम्बे हाईकोर्ट से अंतरिम कॉपीराइट संरक्षण मिलने के बाद फिल्म की सामग्री को अवैध रूप से प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का कानूनी रास्ता और मजबूत हो गया है।

Rajesh Bhagtani
Author: Rajesh Bhagtani

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