की मौत के छह साल बाद एक बार फिर उनका मामला चर्चा में है। पोस्टमॉर्टम से जुड़े पूर्व स्टाफ सदस्य रूपकुमार शाह के पुराने दावे को लेकर नई बहस शुरू हुई है। शाह ने दावा किया था कि सुशांत के शरीर पर ऐसे निशान थे, जिन्हें देखकर उन्हें मौत का मामला सामान्य आत्महत्या जैसा नहीं लगा। उन्होंने यह भी दावा किया था कि मौत से पहले सुशांत का 2-3 बार गला दबाया गया था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र सबूत पेश नहीं किया गया था।
पोस्टमॉर्टम स्टाफ ने क्या कहा था?
रूपकुमार शाह कूपर अस्पताल के मॉर्चरी स्टाफ में थे और उन्होंने सुशांत के पोस्टमॉर्टम से जुड़े होने का दावा किया था। उनके मुताबिक, सुशांत की गर्दन पर कुछ ऐसे निशान थे, जिन्हें उन्होंने सामान्य फांसी के निशान से अलग बताया। शाह ने गर्दन पर दबाव के निशान होने का भी दावा किया था।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये रूपकुमार शाह के व्यक्तिगत दावे हैं और इन्हें आधिकारिक मेडिकल निष्कर्ष नहीं माना गया है।
आधिकारिक जांच में क्या सामने आया?
सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच में पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठे थे। 2020 में मुंबई के पोस्टमॉर्टम से जुड़े डॉक्टरों ने कहा था कि शरीर पर किसी संघर्ष या अन्य बाहरी चोट के निशान नहीं मिले थे और गर्दन पर मौजूद लिगेचर मार्क फांसी से मेल खाते थे।
AIIMS की टीम की जांच में भी हत्या के आरोपों का समर्थन करने वाला निष्कर्ष सामने नहीं आया था। बाद में 2025 में CBI ने अपनी जांच बंद करते हुए फाउल प्ले का सबूत नहीं मिलने की बात कही और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
2026 में फिर क्यों चर्चा में आया मामला?
सुशांत केस से जुड़े सवालों के बीच उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का मामला भी इस साल फिर सुर्खियों में आया है। सितंबर 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज करने और CBI जांच का आदेश दिया। इसके बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में दोनों मामलों को लेकर फिर से सवाल उठने लगे।
हालांकि, दिशा सालियान मामले में सामने आए आरोपों या सुशांत की मौत से जुड़े पुराने दावों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं है। किसी भी नए निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच और ठोस सबूत जरूरी होंगे।
क्या है पूरा मामला?
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को मुंबई स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद मुंबई पुलिस के साथ-साथ अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने भी अलग-अलग पहलुओं की जांच की। मामले को लेकर लंबे समय तक कई तरह के दावे और सवाल सामने आते रहे।
लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जांच के अनुसार हत्या या फाउल प्ले का निष्कर्ष सामने नहीं आया। इसलिए पोस्टमॉर्टम स्टाफ के दावे को एक आरोप/दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।








