चेन्नई: तमिलनाडु में आर. वीरमणि से जुड़े POCSO मामले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री और TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने मदुरांतकम में चुनावी सभा के दौरान इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन से कई सवाल पूछे। विजय ने आरोप लगाया कि पिछली DMK सरकार के कार्यकाल में शिकायत सामने आने के बावजूद मामले को दबाने और जांच को बंद करने की कोशिश हुई।
विजय ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मामले की शिकायत पहले ही सामने आ गई थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई और केस को बंद करने की कोशिश क्यों की गई। उन्होंने स्टालिन से सार्वजनिक तौर पर इस पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। विजय का दावा था कि मामला सामने आने के बाद भी इसकी पूरी पृष्ठभूमि को दबा दिया गया था।
चुनावी मंच से विजय ने उठाया मामला
मदुरांतकम में उपचुनाव के प्रचार के दौरान विजय ने वीरमणि मामले को लेकर DMK पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पहले कार्रवाई नहीं हुई और अब उनकी सरकार ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की है। विजय ने इस मुद्दे को लेकर DMK और उसके सहयोगियों पर भी सवाल खड़े किए।
यह मामला ऐसे समय में राजनीतिक बहस का केंद्र बना है, जब मदुरांतकम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। इसी वजह से विजय और स्टालिन के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं।
स्टालिन ने आरोपों को बताया गलत
विजय के आरोपों पर एमके स्टालिन ने पलटवार किया। स्टालिन ने कहा कि DMK सरकार की ओर से किसी को बचाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। उन्होंने आरोपों को गलत और मानहानिकारक बताया। स्टालिन ने कहा कि मामले में जो भी दोषी है, उसे कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए और किसी को भी कानून से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।
स्टालिन ने यह भी कहा कि संवेदनशील मामले को चुनावी राजनीति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने विजय पर आरोप लगाया कि मदुरांतकम के उपचुनाव प्रचार के दौरान इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
कोर्ट की भूमिका भी चर्चा में
मामले की जांच में उस समय अहम मोड़ आया जब विशेष POCSO अदालत ने मामले को बंद करने वाली रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद जांच आगे बढ़ी और कई अन्य नाबालिग पीड़िताओं के सामने आने की बात सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक जांच के दौरान महत्वपूर्ण वीडियो साक्ष्य भी सामने आए, जिसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
इसी वजह से अब राजनीतिक बहस इस सवाल पर केंद्रित है कि शुरुआती जांच में क्या हुआ था और मामले को बंद करने की कोशिश क्यों हुई। हालांकि, DMK की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि सरकार ने किसी आरोपी को बचाने का निर्देश नहीं दिया था।
मामला बना सियासी टकराव का नया मुद्दा
वीरमणि मामले को लेकर विजय और स्टालिन के बीच बढ़ती बयानबाजी ने तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विजय जहां पिछली सरकार की भूमिका और जांच में हुई देरी पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं स्टालिन मामले को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए अपने शासनकाल में किसी तरह के संरक्षण से इनकार कर रहे हैं।
फिलहाल इस मामले में राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ जांच और न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में वीरमणि केस को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।








