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June 26, 2026 9:22 am

यूरोप में भीषण हीटवेव 2026: आखिर क्या है ‘ओमेगा ब्लॉक’, जिसने फ्रांस को 44°C से ज्यादा गर्म कर दिया? भारत की गर्मी से कितना अलग है यूरोप का मौसम?

यूरोप में भीषण हीटवेव 2026:
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International Desk | Updated: 26 June 2026  यूरोप इस समय पिछले कई दशकों की सबसे खतरनाक गर्मी का सामना कर रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, ब्रिटेन, जर्मनी, पुर्तगाल और अन्य देशों समेत लगभग 26 यूरोपीय देश भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। कई स्थानों पर तापमान 44 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी कस्बे पिसोस (Pissos) में 44.3°C तापमान दर्ज किया गया, जिसने वर्षों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि फ्रांस में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं, न्यूक्लियर पावर प्लांट का संचालन रोकना पड़ा है और स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से घरों में रहने की अपील कर रही हैं।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर यूरोप, जहां आमतौर पर गर्मियां 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहती हैं, वहां अचानक इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही है?

इसका जवाब छिपा है एक दुर्लभ मौसमीय प्रणाली में जिसे वैज्ञानिक “ओमेगा ब्लॉक (Omega Block)” कहते हैं।

क्या है ओमेगा ब्लॉक?

ओमेगा ब्लॉक वायुमंडल में बनने वाला एक हाई-प्रेशर सिस्टम है, जिसका आकार ग्रीक अक्षर Ω (ओमेगा) जैसा दिखाई देता है। यह सिस्टम कई दिनों या कई सप्ताह तक एक ही स्थान पर स्थिर रह सकता है।

जब ऐसा होता है तो मौसम बदलना लगभग बंद हो जाता है। बादल नहीं बनते, बारिश नहीं होती और ठंडी हवाएं उस क्षेत्र तक नहीं पहुंच पातीं।

हाई प्रेशर लगातार नीचे की ओर दबाव बनाता है जिससे हवा और अधिक गर्म होती चली जाती है। वैज्ञानिक इसे Heat Dome Effect भी कहते हैं क्योंकि यह गर्म हवा को ढक्कन की तरह कैद कर देता है।

सहारा रेगिस्तान की गर्म हवा बनी सबसे बड़ा कारण

इस बार ओमेगा ब्लॉक के साथ उत्तर अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से आने वाली अत्यधिक गर्म और शुष्क हवाएं सीधे स्पेन, फ्रांस और इटली तक पहुंच गईं।

भूमध्य सागर पार करते हुए यह हवा पहले से गर्म यूरोपीय महाद्वीप में फंस गई और तापमान तेजी से बढ़ गया।

यही कारण है कि फ्रांस, स्पेन और इटली में कई स्थानों पर तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

फ्रांस में हालात कितने गंभीर हैं?

फ्रांस इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।

  • पिसोस में 44.3°C तापमान दर्ज।
  • 1947 के बाद सबसे गर्म रात रिकॉर्ड हुई।
  • 13,500 से अधिक स्कूल बंद या समय बदला गया।
  • गारोन नदी का पानी गर्म होने पर गोलफेक न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा।
  • सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर अस्थायी रोक।
  • नदियों और झीलों में राहत तलाशने गए कई लोगों की डूबने से मौत।

सरकार ने नागरिकों से दोपहर में बाहर नहीं निकलने, पर्याप्त पानी पीने और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है।

स्पेन, इटली और ब्रिटेन में भी संकट

स्पेन के कई हिस्सों में तापमान 44°C तक पहुंचने का अनुमान है।

इटली के रोम, मिलान, फ्लोरेंस सहित 16 प्रमुख शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

ब्रिटेन में जून का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया जहां तापमान 36.4°C तक पहुंच गया। ब्रिटिश मौसम विभाग ने इतिहास में दूसरी बार अत्यधिक गर्मी की चेतावनी जारी की है।

भारत और यूरोप की गर्मी में सबसे बड़ा अंतर

भारत में गर्मी हर साल अप्रैल और मई के दौरान प्री-मानसून सीजन में पड़ती है।

Devender Singh
Author: Devender Singh

tv journalist with a 25 years of experience. Earlier worked for etv,indianews, sahara samay, bharat express etc

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