कम उम्र में हार्ट अटैक और हृदय संबंधी समस्याओं के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि कई बार ऐसे लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं जो बाहर से पूरी तरह फिट दिखाई देते हैं। AIIMS नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के मुताबिक, इसके पीछे केवल खान-पान ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि बदलती जीवनशैली, कुछ आदतें और छिपे हुए जेनेटिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।
सिर्फ हेल्दी डाइट से दिल पूरी तरह सुरक्षित नहीं
कई युवा मानते हैं कि अगर वे घर का खाना खाते हैं और जंक फूड से दूरी रखते हैं तो उनका दिल स्वस्थ रहेगा। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक हार्ट हेल्थ कई कारकों पर निर्भर करती है। खान-पान के साथ पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, तनाव और नींद जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हैं।
AIIMS विशेषज्ञ ने युवाओं में बढ़ते हृदय जोखिम के पीछे लाइफस्टाइल संबंधी आदतों और कुछ आनुवंशिक स्थितियों की ओर भी ध्यान दिलाया है। यानी किसी व्यक्ति का वजन सामान्य दिखाई देने के बावजूद उसके शरीर में ऐसे जोखिम कारक मौजूद हो सकते हैं जिनका बाहर से पता नहीं चलता।
लंबे समय तक बैठे रहना भी चिंता की वजह
आज की जीवनशैली में पढ़ाई, काम और स्क्रीन के कारण लंबे समय तक बैठे रहना आम हो गया है। शारीरिक गतिविधि कम होने से हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। AIIMS के डॉक्टरों ने युवाओं में बढ़ते हाइपरटेंशन के संदर्भ में भी लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठने, शारीरिक श्रम की कमी और बदलती जीवनशैली को चिंता का विषय बताया है।
इसलिए केवल कभी-कभार एक्सरसाइज करना पर्याप्त मानने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहना जरूरी है। नियमित चलना, खेलकूद या उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार शारीरिक गतिविधि दिल की सेहत के लिए मददगार हो सकती है।
तनाव और नींद को भी नजरअंदाज न करें
युवाओं की जिंदगी में पढ़ाई, नौकरी, प्रतिस्पर्धा और दूसरी जिम्मेदारियों के कारण तनाव बढ़ सकता है। लगातार तनाव और खराब नींद स्वास्थ्य पर व्यापक असर डाल सकते हैं। इसलिए दिल की सेहत के लिए सिर्फ खाने की प्लेट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है; रोज की पूरी दिनचर्या को संतुलित रखना जरूरी है।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की जांच क्यों जरूरी?
हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं। इसी वजह से व्यक्ति खुद को स्वस्थ समझ सकता है, जबकि अंदरूनी जोखिम मौजूद हो सकता है। विशेषज्ञ युवाओं में भी जरूरत के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों की पहचान पर जोर देते हैं।
हृदय के लिए संतुलित आहार में फल-सब्जियां, साबुत अनाज और बेहतर गुणवत्ता वाले प्रोटीन को शामिल करना तथा अत्यधिक नमक, प्रोसेस्ड और बहुत ज्यादा संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करना मददगार माना जाता है।
जेनेटिक कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार
अगर परिवार में कम उम्र में हृदय संबंधी बीमारी का इतिहास रहा है, तो डॉक्टर से इस बारे में जानकारी साझा करना महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ आनुवंशिक स्थितियां व्यक्ति में हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकती हैं। ऐसे मामलों में केवल वजन या डाइट देखकर खुद को पूरी तरह सुरक्षित मानना सही नहीं है। AIIMS विशेषज्ञ ने भी छिपी हुई जेनेटिक स्थितियों को युवाओं में हृदय रोग के संभावित कारणों में शामिल किया है।
क्या सावधानी बरतें?
युवाओं को संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव को संभालने पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों की जानकारी रखना भी उपयोगी है। यदि किसी को सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण हों, तो तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को बताकर चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
निष्कर्ष: कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम केवल यह देखकर तय नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति कितना फिट दिखता है या कितना हेल्दी खाना खाता है। लाइफस्टाइल, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कारक और पारिवारिक इतिहास—इन सभी पर ध्यान देना जरूरी है। AIIMS विशेषज्ञ की सलाह का मुख्य संदेश यही है कि दिल की सेहत के लिए पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल डाइट पर।








