पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने उन पर निशाना साधा है। राजद ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर बिना किसी का नाम लिए उन्हें ‘गद्दार’ करार दिया और कहा कि उन्हें अपने कर्मों की सजा मिल रही है। पार्टी की यह टिप्पणी फरवरी 2024 में बिहार विधानसभा में हुए शक्ति परीक्षण की घटना से जुड़ी मानी जा रही है, जब अनंत सिंह की पत्नी और उस समय राजद की विधायक रहीं नीलम देवी ने पार्टी का साथ छोड़कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के पक्ष में मतदान किया था।
राजद ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का उल्लेख करते हुए अपनी राजनीतिक निष्ठा का दावा किया। पार्टी ने कहा कि उसके नेतृत्व ने सत्ता हासिल करने के लिए कभी किसी का अहित नहीं किया और न ही अनैतिक तरीकों को स्वीकार किया। पोस्ट में दावा किया गया कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने जेल जाने और मीडिया ट्रायल का सामना करने के बावजूद अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। पार्टी ने यह भी कहा कि उसने सरकार गंवाना स्वीकार किया, लेकिन किसी का बुरा नहीं किया। राजद के मुताबिक, तमाम राजनीतिक साजिशों के बावजूद उसके नेतृत्व का कुछ नहीं बिगाड़ा जा सका।
2024 के फ्लोर टेस्ट का किया जिक्र
राजद ने अपनी पोस्ट में फरवरी 2024 के बिहार विधानसभा शक्ति परीक्षण का उल्लेख करते हुए पार्टी से अलग होकर सत्ता पक्ष का समर्थन करने वाले विधायकों पर निशाना साधा। पार्टी ने दावा किया कि उस समय तेजस्वी यादव ने विधानसभा में तीनों बागी विधायकों को उनके फैसले के संभावित परिणामों के बारे में आगाह किया था। राजद के अनुसार, तेजस्वी ने उन्हें विनम्रता से समय के बदलते मिजाज को समझने की बात कही थी।
पोस्ट में राजद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 के विश्वास मत के दौरान पार्टी के साथ विश्वासघात किया गया था। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि उसके साथ गद्दारी करने वाले तीनों विधायकों के लिए सजा का एक दौर अभी पूरा हुआ है और वे अपने परिजनों के साथ परेशान हैं। हालांकि, ये टिप्पणियां राजद की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।
राजद ने आगे लिखा कि गद्दारी करने और करवाने वाले दोनों ही आज मुश्किल परिस्थितियों में हैं। पार्टी ने गठबंधन तोड़ने, सरकार बचाने और राजनीतिक समीकरण बदलने में भूमिका निभाने वालों की मौजूदा स्थिति पर भी कटाक्ष किया। पोस्ट के अंत में पार्टी ने लिखा, “बुरे कर्म का बुरा नतीजा। ईश्वर की लाठी में आवाज नहीं होती।” इस टिप्पणी के जरिए राजद ने अपने पुराने राजनीतिक विरोधियों को उनके फैसलों का परिणाम भुगतने की बात कही।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 12 फरवरी 2024 को बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का शक्ति परीक्षण हुआ था। इससे पहले जनता दल यूनाइटेड से अलग होकर महागठबंधन की सरकार गिरने के बाद नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी। इस सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना था।
उस समय मोकामा से राजद विधायक रहीं नीलम देवी ने अपनी पार्टी की लाइन से अलग रुख अपनाते हुए एनडीए सरकार का समर्थन किया था। वर्ष 2022 में राजद के टिकट पर मोकामा उपचुनाव जीतने वाली नीलम देवी शक्ति परीक्षण से पहले विपक्षी खेमे से निकलकर सत्ता पक्ष की ओर जाकर बैठ गई थीं। बाद में उन्होंने सदन में सरकार के पक्ष में मतदान किया। उनके अलावा राजद के दो अन्य विधायकों, चेतन आनंद और प्रह्लाद यादव ने भी उस दौरान पाला बदल लिया था।
इस घटनाक्रम के बाद तेजस्वी यादव ने सदन में नीलम देवी को संबोधित करते हुए कहा था कि बात बने या न बने, उन्हें बाद में यह बात जरूर याद आएगी। उस समय विधायकों के पाला बदलने को लेकर बिहार की राजनीति में काफी विवाद हुआ था।
अब अनंत सिंह और नीलम देवी को जदयू से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद राजद ने एक बार फिर पुराने घटनाक्रम को याद करते हुए राजनीतिक हमला बोला है। बिना नाम लिए ‘गद्दार’ कहने और कर्मों की सजा मिलने संबंधी टिप्पणी के जरिए पार्टी ने अपने विरोधियों पर निशाना साधा है। इस घटनाक्रम ने बिहार में राजनीतिक बयानबाजी को फिर से तेज कर दिया है।








