राममंदिर से जुड़ी कथित चोरी के मामले में जांच अब एक नए और रहस्यमयी मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को लगातार ऐसे सुराग मिल रहे हैं, जो पूरे केस को और पेचीदा बना रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में आरोपी अविनाश के घर से एक संदूक बरामद हुआ है, जिस पर ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ था और साथ ही एक QR कोड भी चिपका हुआ मिला, जिसने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, यह बरामदगी उस समय हुई जब SIT की टीम ने अविनाश के घर पर विस्तृत तलाशी अभियान चलाया। टीम को घर के एक बंद कमरे से एक पुराना दिखने वाला संदूक मिला, जो सामान्य रूप से देखने में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का प्रतीत हो रहा था। लेकिन जब इसे खोला गया और इसकी जांच की गई, तो इसके अंदर मौजूद चीजों और बाहर की मार्किंग ने जांच अधिकारियों को हैरान कर दिया।
संदूक पर ‘रामराज्य कोष’ और QR कोड ने बढ़ाई उलझन
बरामद संदूक के बाहर बड़े अक्षरों में ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ था, जबकि उसके ऊपर एक QR कोड भी चिपका हुआ पाया गया। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह QR कोड किस उद्देश्य से लगाया गया था और इसका संबंध किस डिजिटल या वित्तीय सिस्टम से है।
SIT के अधिकारियों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक सामान्य चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क या योजनाबद्ध गतिविधि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। QR कोड की तकनीकी जांच के लिए इसे साइबर विशेषज्ञों को भेजा गया है, ताकि इसके डेटा और लिंक का पता लगाया जा सके।
जांच में तेजी, SIT को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय
इस बीच, जांच की प्रगति को देखते हुए अदालत या संबंधित प्राधिकरण द्वारा SIT को मामले की गहन जांच के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। टीम अब इस केस से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें संदूक की उत्पत्ति, ‘रामराज्य कोष’ का अर्थ और QR कोड का तकनीकी विश्लेषण शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में डिजिटल साक्ष्य और भौतिक सबूत दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर एंगल से जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों में चर्चा तेज
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे किसी धार्मिक या प्रतीकात्मक गतिविधि से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे एक संगठित वित्तीय या डिजिटल लेन-देन से जुड़ा मामला मान रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने का इंतजार करें।
आगे की जांच जारी
फिलहाल SIT ने संदूक को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। साथ ही अविनाश से भी लगातार पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह संदूक उसके घर तक कैसे पहुंचा और इसका वास्तविक उपयोग क्या था।
इस पूरे मामले ने जांच एजेंसियों के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं और अब सभी की नजरें SIT की आगामी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस रहस्यमयी केस से पर्दा उठा सकती है।








