जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने इतिहास में पहली बार रात में विशेष सुनवाई की। नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले पार्षदों और प्रत्याशियों की गिरफ्तारी की आशंका के बीच रविवार रात करीब 10 बजे कोर्ट के दरवाजे खोले गए। सुनवाई तड़के करीब 2 बजे तक चली और अदालत ने कई पार्षदों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी।
क्या था मामला?
नगर परिषदों के अध्यक्ष और सभापति पद के चुनाव से पहले कई पार्षदों को पुराने मामलों में गिरफ्तारी का डर सता रहा था। हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनका कहना था कि पुलिस और एसीबी की संभावित कार्रवाई से उन्हें मतदान से रोका जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश की विशेष अनुमति से दो अलग-अलग एकल पीठ गठित की गईं।
- जस्टिस नूपुर भाटी की पीठ ने रात 10 बजे हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों की याचिका पर सुनवाई शुरू की।
- जस्टिस सुनील बेनीवाल की पीठ ने बीकानेर के कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद (पूर्व यूआईटी अध्यक्ष) की याचिका सुनी।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने दोनों मामलों में पार्षदों की गिरफ्तारी पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया में उनका मताधिकार प्रभावित न हो। बीकानेर मामले में रात करीब 11:15 बजे और हनुमानगढ़ मामले में तड़के 2 बजे तक आदेश जारी हुए।
इससे पहले दिन में भी कोर्ट ने कुचेरा (नागौर) और श्रीविजयनगर के कुछ प्रत्याशियों-पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी।
क्यों हुई रात में सुनवाई?
चुनाव की तारीख नजदीक होने और गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए कोर्ट ने अवकाश के दिन भी विशेष व्यवस्था की। यह राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ जब इतनी देर रात तक सुनवाई चली।
पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। आगे की सुनवाई अक्टूबर में निर्धारित की गई है।








