पटना । बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने खरगे के बयान की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक मर्यादा और शिष्टाचार के विरुद्ध बताया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष पर तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक मंचों पर भाषा की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। वहीं, यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर साधा निशाना
बिहार भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पटना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह कांग्रेस की राजनीतिक सोच को दर्शाता है। नितिन नवीन के मुताबिक, राजनीतिक विरोध और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा और गरिमा होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष के पास विकास, सरकारी नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा करने के लिए ठोस मुद्दे नहीं होते, तब वह व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक मंच से दिवंगत परिजनों को राजनीतिक विवाद में शामिल करना उचित नहीं है। नितिन नवीन ने दावा किया कि जनता इस तरह की बयानबाजी पर नजर रख रही है और समय आने पर अपना जवाब देगी।
अमित शाह ने कहा- राजनीतिक मर्यादाओं का हुआ उल्लंघन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी खरगे की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर अपने बयान में आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता के बारे में अभद्र टिप्पणी करके राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। अमित शाह ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी या उनके परिवार को लेकर विवादित बयान दिए हों।
अमित शाह ने अपने बयान में प्रधानमंत्री की मां को लेकर पूर्व में की गई टिप्पणियों और उन्हें ‘मौत का सौदागर’ तथा ‘चायवाला’ कहे जाने जैसे राजनीतिक विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार व्यक्तिगत हमलों की राजनीति कर रही है। शाह के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में लगातार चुनावी हार का सामना करने के कारण कांग्रेस में निराशा बढ़ी है और पार्टी के पास नीतियों तथा मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लेने की प्रवृत्ति बढ़ गई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर की गई टिप्पणियों पर जनता पहले भी चुनावों में प्रतिक्रिया दे चुकी है। हालांकि, ये बातें अमित शाह की राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोपों के रूप में सामने आई हैं।
आखिर खरगे ने क्या कहा था?
यह विवाद पटना में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे संबोधित कर रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने कथित तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहीं नहीं जाएंगे।
इस टिप्पणी के जवाब में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा। चल मोदी की झूठ बोलने की आदत है।” उनके इस जवाब के बाद कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। सामने आई जानकारी के अनुसार, इस दौरान कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता उस व्यक्ति के साथ मारपीट करते हुए भी दिखाई दिए, जिसने प्रधानमंत्री को लेकर टिप्पणी की थी।
खरगे के बयान का यह हिस्सा सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसे लेकर विरोध जताया। विवाद का केंद्र प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई राजनीतिक टिप्पणी के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल किए गए शब्द भी रहे।
बयानबाजी के बीच राजनीतिक विवाद तेज
खरगे की टिप्पणी पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भाजपा नेताओं ने जहां बयान को अनुचित बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व को घेरा है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने सार्वजनिक मंचों पर राजनीतिक भाषा और नेताओं के बीच संवाद की मर्यादा को लेकर बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक दलों के बीच मतभेद और एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। हालांकि, इस तरह के विवादों में नेताओं के बयानों, उनकी पृष्ठभूमि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल, पटना में खरगे की टिप्पणी को लेकर भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है और यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।








