राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को राज्य सरकार ने APO (Awaiting Posting Orders) कर दिया है। यह कार्रवाई उनके परिवार की ओर से उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में 40 विला-कॉटेज खरीदने और फिर उन्हें उसी कंपनी को लीज पर देने का मामला सामने आने के बाद हुई है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 6.16 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, जबकि लीज के जरिए हर साल करीब 1.80 करोड़ रुपये की आय तय होने की जानकारी सामने आई है। इस पूरे मामले में अधिकारी की अचल संपत्ति की घोषणा यानी IPR में दर्ज विवरण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
ढाई साल में खरीदे 40 विला-कॉटेज
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिखर अग्रवाल के परिवार ने करीब ढाई साल के दौरान उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट में कुल 40 संपत्तियां खरीदीं। इनमें उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में 20 कॉटेज और अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में 20 विला शामिल हैं। इन संपत्तियों को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से खरीदा गया था।
जानकारी के अनुसार, उदयपुर में 20 कॉटेज की रजिस्ट्री 29 सितंबर 2023 को हुई थी। इसके बाद मार्च 2026 में अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 20 विला की रजिस्ट्री कराई गई। अलवर की संपत्तियों की रजिस्ट्री 27 मार्च 2026 को हुई थी। दोनों जगह खरीदी गई संपत्तियों की कुल कीमत 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है।
खरीद के साथ ही लीज पर देने का समझौता
इस मामले में एक अहम पहलू यह है कि संपत्तियां खरीदने के साथ ही उन्हें बेचने वाली कंपनी को लीज पर देने के समझौते भी किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर के प्रत्येक कॉटेज के लिए सालाना चार लाख रुपये की लीज राशि तय की गई। इस हिसाब से 20 कॉटेज से हर साल 80 लाख रुपये मिलने थे।
वहीं, अलवर के प्रत्येक विला के लिए सालाना पांच लाख रुपये की लीज राशि तय होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह 20 विला से हर साल एक करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित हुई। दोनों जगह की संपत्तियों को मिलाकर सालाना लीज की कुल रकम करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपये बताई गई है।
यानी परिवार की ओर से खरीदी गई 40 संपत्तियों को लीज पर देने के समझौतों के जरिए नियमित आय का प्रावधान किया गया था। अब संपत्तियों की खरीद, उनके स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेज चर्चा में हैं।
परिवार के सदस्यों के नाम पर हुई रजिस्ट्री
रिपोर्ट के मुताबिक, इन संपत्तियों की रजिस्ट्री IAS शिखर अग्रवाल, उनकी IPS अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर कराई गई। इनमें प्रशाखा माथुर के माता-पिता मंजुला और रघुवंश नारायण माथुर के नाम भी शामिल बताए गए हैं। परिवार के दोनों बेटों की ओर से रजिस्ट्री पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम पर कुल 28 विला-कॉटेज दर्ज हैं। परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर संपत्तियों का पंजीकरण होने के कारण अब संबंधित दस्तावेजों और घोषित संपत्ति के विवरण की चर्चा हो रही है।
IPR में दर्ज जानकारी पर क्यों उठे सवाल?
इस मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अचल संपत्ति की वार्षिक घोषणा यानी IPR से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने 7 जनवरी 2026 को दाखिल अपनी अचल संपत्ति की जानकारी में 14 संपत्तियों का उल्लेख किया था। वहीं, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर ने 8 जनवरी 2026 को दाखिल IPR में संपत्ति से संबंधित जानकारी शून्य बताई थी।
अब परिवार की ओर से खरीदी गई 40 संपत्तियों और उन्हें लीज पर देने के दस्तावेज सामने आने के बाद IPR में दर्ज विवरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, संपत्तियों के स्वामित्व, उनके हिस्से और घोषणा संबंधी नियमों के संदर्भ में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक पक्ष को देखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर इन सवालों को उठे हुए सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कौन हैं IAS शिखर अग्रवाल?
शिखर अग्रवाल राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। वे राज्य सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के पद पर तैनात रहे हैं। उनके पास उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), सरकारी उपक्रम, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और निवेश से जुड़े विभागों की जिम्मेदारियां रही हैं।
उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर IPS अधिकारी हैं और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) स्तर पर तैनात बताई गई हैं। वे पुलिस विभाग में योजना, आधुनिकीकरण और कल्याण से जुड़े काम देख रही थीं।
APO किए जाने के बाद मामला चर्चा में
40 विला-कॉटेज की खरीद, करोड़ों रुपये की कुल संपत्ति और सालाना 1.80 करोड़ रुपये की लीज राशि से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद राजस्थान में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल को APO कर दिया है। APO का अर्थ है कि अधिकारी को फिलहाल नई पोस्टिंग के आदेश की प्रतीक्षा करनी होती है।
फिलहाल इस मामले में संपत्तियों की खरीद, लीज के समझौतों और IPR में दर्ज जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही पूरे प्रकरण की तस्वीर और साफ हो सकेगी।








